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रोजगार आंदोलन में शहीद हो गई बच्ची
अमर उजाला, बठिंडा
Updated Thu, 06 Feb 2014 11:02 PM IST
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पंजाब में ईजीएस और एआईई के अध्यापकों द्वारा जारी रोजगार आंदोलन में जुटे अध्यापकों और शहरवासियों को वीरवार को एक हादसे ने दुख से भर दिया। आंदोलन में शामिल बेरोजगार महिला टीचर की चौदह महीने की मासूम बच्ची की ठंड से मौत हो गई।
आरोप है कि सोमवार रात कड़ाके की ठंड में दूधमुंही बच्ची रुत अपनी मां किरनजीत कौर की गोद में लेटी थी और पुलिस वाले धरने से हटाने के लिए उनकी रजाई, कंबल और दरियां तक छीनकर ले गए। सारी रात अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मां-बेटी भी ठंड में बैठे रहे। ठंड से कांपती बच्ची को सुबह अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां वीरवार को मासूम ने दम तोड़ दिया।
बच्ची की मौत की खबर आते ही धरनास्थल पर बैठे आंदोलनकारी रो पड़े वहीं आसपास के लोगों ने मासूम की मौत पर दुख जताया। पांच दिन से नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार एजूकेशन गारंटी स्कीम (ईजीएस) और अल्टरनेटिव इनोवेटिव एजूकेशन (एआईई) अध्यापक रोष में आ गए और उन्होंने बच्ची के शव को साथ लेकर वीरवार सुबह करीब 11 बजे गोल डिग्गी के नीचे प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लेकिन बावजूद इसके प्रशासन का कोई उच्च अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचा तो प्रदर्शनकारी नए बस अड्डे के बाहर मुख्य चौक पर बच्ची का शव रखकर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने जीटी रोड पर जाम लगा दिया।
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बच्ची की मां किरनजोत कौर, प्रदर्शनकारी नेता वीरपाल कौर सिधाना और गगनदीप कौर ने मासूम बच्ची की मौत के लिए पंजाब सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार रात धरना दे रहे टीचरों को आसपास के लोगों द्वारा दी गई रजाई, कंबल और दरियां आदि बठिंडा पुलिस के जवान छीनकर ले गए। ठंड के कारण बच्ची बीमार हो गई और उसे सोमवार को ही अस्पताल में दाखिल करवाया जा सका। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भी प्रशासन की दखलंदाजी की वजह से डाक्टरों ने बच्ची के इलाज में कोताही बरती। उन्होंने कहा कि बच्ची को कोई बीमारी नहीं थी।
उन्होंने सरकार से मृतक बच्ची के परिवार को 20 लाख का मुआवजा, बच्ची के पिता को सरकारी नौकरी और एआईई व ईजीएस अध्यापक यूनियन के सभी सदस्यों को पक्की नौकरी देने की अधिसूचना जारी करने की मांग रखी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (उगराहा), प्रगतिशील स्त्री जागृति मंच, जिला कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, आम आदमी पाटी व सीपीआई लिबरेशन (एमएल) के नेता व कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर बरसे। खबर लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी धरना पर बैठे हुए थे।
डीसी ने मुआवजे में लगा दी शर्त
डीसी कमल किशोर ने कहा है कि अगर पीड़ित परिवार बच्ची का अंतिम संस्कार कर देता है तो प्रशासन पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये दे सकता है। पिता की नौकरी और अन्य मांगों के लिए वे सरकार से बात करेंगे। इससे पहले धरने के दौरान करीब तीन बजे एडीसी राजीव पराशर ने धरनास्थल पर पहुंचे और बच्ची के परिवार के साथ हमदर्दी प्रकट करते हुए बच्ची के शव का अंतिम संस्कार करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सही ढंग से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
सिविल सर्ज ने कहा, कुपोषण से हुई मौत
सिविल सर्जन अजय कुमार साहनी के मुताबिक, बच्ची की मौत कुपोषण से हुई है। उन्होंने कहा कि बच्ची को दौरे भी पड़ते थे। मौत की असली वजह का पता तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।
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आरोप है कि सोमवार रात कड़ाके की ठंड में दूधमुंही बच्ची रुत अपनी मां किरनजीत कौर की गोद में लेटी थी और पुलिस वाले धरने से हटाने के लिए उनकी रजाई, कंबल और दरियां तक छीनकर ले गए। सारी रात अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ मां-बेटी भी ठंड में बैठे रहे। ठंड से कांपती बच्ची को सुबह अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां वीरवार को मासूम ने दम तोड़ दिया।
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बच्ची की मौत की खबर आते ही धरनास्थल पर बैठे आंदोलनकारी रो पड़े वहीं आसपास के लोगों ने मासूम की मौत पर दुख जताया। पांच दिन से नौकरी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बेरोजगार एजूकेशन गारंटी स्कीम (ईजीएस) और अल्टरनेटिव इनोवेटिव एजूकेशन (एआईई) अध्यापक रोष में आ गए और उन्होंने बच्ची के शव को साथ लेकर वीरवार सुबह करीब 11 बजे गोल डिग्गी के नीचे प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लेकिन बावजूद इसके प्रशासन का कोई उच्च अधिकारी धरनास्थल पर नहीं पहुंचा तो प्रदर्शनकारी नए बस अड्डे के बाहर मुख्य चौक पर बच्ची का शव रखकर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने जीटी रोड पर जाम लगा दिया।
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बच्ची की मां किरनजोत कौर, प्रदर्शनकारी नेता वीरपाल कौर सिधाना और गगनदीप कौर ने मासूम बच्ची की मौत के लिए पंजाब सरकार और जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रविवार रात धरना दे रहे टीचरों को आसपास के लोगों द्वारा दी गई रजाई, कंबल और दरियां आदि बठिंडा पुलिस के जवान छीनकर ले गए। ठंड के कारण बच्ची बीमार हो गई और उसे सोमवार को ही अस्पताल में दाखिल करवाया जा सका। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में भी प्रशासन की दखलंदाजी की वजह से डाक्टरों ने बच्ची के इलाज में कोताही बरती। उन्होंने कहा कि बच्ची को कोई बीमारी नहीं थी।
उन्होंने सरकार से मृतक बच्ची के परिवार को 20 लाख का मुआवजा, बच्ची के पिता को सरकारी नौकरी और एआईई व ईजीएस अध्यापक यूनियन के सभी सदस्यों को पक्की नौकरी देने की अधिसूचना जारी करने की मांग रखी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा। इस दौरान भारतीय किसान यूनियन (उगराहा), प्रगतिशील स्त्री जागृति मंच, जिला कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी, आम आदमी पाटी व सीपीआई लिबरेशन (एमएल) के नेता व कार्यकर्ता भी उनके समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर बरसे। खबर लिखे जाने तक प्रदर्शनकारी धरना पर बैठे हुए थे।
डीसी ने मुआवजे में लगा दी शर्त
डीसी कमल किशोर ने कहा है कि अगर पीड़ित परिवार बच्ची का अंतिम संस्कार कर देता है तो प्रशासन पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये दे सकता है। पिता की नौकरी और अन्य मांगों के लिए वे सरकार से बात करेंगे। इससे पहले धरने के दौरान करीब तीन बजे एडीसी राजीव पराशर ने धरनास्थल पर पहुंचे और बच्ची के परिवार के साथ हमदर्दी प्रकट करते हुए बच्ची के शव का अंतिम संस्कार करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सही ढंग से सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
सिविल सर्ज ने कहा, कुपोषण से हुई मौत
सिविल सर्जन अजय कुमार साहनी के मुताबिक, बच्ची की मौत कुपोषण से हुई है। उन्होंने कहा कि बच्ची को दौरे भी पड़ते थे। मौत की असली वजह का पता तो पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।