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25 से 28 दिसंबर तक पूरे प्रदेश की अनाज मंडी रहेंगी बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Wed, 23 Dec 2015 09:54 PM IST
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धान की अदायगी में देरी होने से प्रदेशभर में आढ़तियों ने 25 से 28 दिसंबर तक अनाज मंडी बंद रखने का एलान किया है।
साथ ही 28 दिसंबर को जगरांव में राज्यस्तरीय धरना देते मुख्य मार्ग पर जाम लगाने की घोषणा भी की है।
स्थानीय दाना मंडी में प्रेसवार्ता के दौरान पंजाब आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कालड़ा व उपाध्यक्ष अमरजीत बराड़ ने कहा कि 28 दिसंबर को आढ़ती पुरानी दाना मंडी जगरांव में सुबह 11 बजे एकत्र होंगे। वहां रोष मार्च निकालते हुए मुख्य जीटी रोड जाम करेंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच कोई पुराना लेन-देन है तो इसकी मार आढ़तियों और किसानों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि धान की अदायगी में देरी होने से आढ़तियों को 250 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बीते कई सालों से राज्य के किसान घाटे की खेती कर रहे हैं। इस बार भी धान का उचित रेट न मिलने से अधिकतर किसान अपना पिछली फसल का खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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बीते साल के मुकाबले इस बार धान के रेटों में काफी गिरावट आई है, जबकि किसानों का खर्च बढ़ा है। अधिकांश किसान आढ़ती से कर्ज लेकर खेती करते हैं।
फसल आते आते उनका कर्ज बढ़ जाता है, किसानों के पास आय का और कोई स्त्रत्तेत नहीं है। जिन रेटों में उनका धान बिक रही है, उसमें उनका खर्च भी पूरा नहीं हो रहा।
आढ़ती का मूल व ब्याज अलग रहा ऐसे में किसान आत्महत्या जैसा कदम उठा जाते हैं। यही हाल कपास की फसल का भी रहा है। शैलर मालिक, व्यापारी तो एक बार घाटा भी सहन कर सकते हैं।
वहीं किसान जोकि जमीन ठेके पर लेकर फसल बीजता है। उसमें घाटा आए तो वह उस उबर नहीं पाता, क्या इसमें सरकार की कोई जिम्मेवारी नहीं है।
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साथ ही 28 दिसंबर को जगरांव में राज्यस्तरीय धरना देते मुख्य मार्ग पर जाम लगाने की घोषणा भी की है।
स्थानीय दाना मंडी में प्रेसवार्ता के दौरान पंजाब आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कालड़ा व उपाध्यक्ष अमरजीत बराड़ ने कहा कि 28 दिसंबर को आढ़ती पुरानी दाना मंडी जगरांव में सुबह 11 बजे एकत्र होंगे। वहां रोष मार्च निकालते हुए मुख्य जीटी रोड जाम करेंगे।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच कोई पुराना लेन-देन है तो इसकी मार आढ़तियों और किसानों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि धान की अदायगी में देरी होने से आढ़तियों को 250 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में नुकसान हो रहा है।
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उन्होंने कहा कि बीते कई सालों से राज्य के किसान घाटे की खेती कर रहे हैं। इस बार भी धान का उचित रेट न मिलने से अधिकतर किसान अपना पिछली फसल का खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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बीते साल के मुकाबले इस बार धान के रेटों में काफी गिरावट आई है, जबकि किसानों का खर्च बढ़ा है। अधिकांश किसान आढ़ती से कर्ज लेकर खेती करते हैं।
फसल आते आते उनका कर्ज बढ़ जाता है, किसानों के पास आय का और कोई स्त्रत्तेत नहीं है। जिन रेटों में उनका धान बिक रही है, उसमें उनका खर्च भी पूरा नहीं हो रहा।
आढ़ती का मूल व ब्याज अलग रहा ऐसे में किसान आत्महत्या जैसा कदम उठा जाते हैं। यही हाल कपास की फसल का भी रहा है। शैलर मालिक, व्यापारी तो एक बार घाटा भी सहन कर सकते हैं।
वहीं किसान जोकि जमीन ठेके पर लेकर फसल बीजता है। उसमें घाटा आए तो वह उस उबर नहीं पाता, क्या इसमें सरकार की कोई जिम्मेवारी नहीं है।