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प्रशासन की मंजूरी के बिना लगाया था कैंप, सेहत विभाग ने मारा छापा
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Wed, 30 Dec 2015 07:31 PM IST
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गांव जंगीराणा में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर की ओर से सेहत विभाग और प्रशासन की मंजूरी के बिना लगाए गए कैंप पर बुधवार को सेहत विभाग ने थाना नंदगढ़ पुलिस को साथ लेकर छापामारी की।
इसके बाद उन्होंने कैंप को तुरंत बंद करवाया। साथ ही कैंप में पड़ी डॉक्टर की दवाओं को तुरंत कब्जे में ले लिया। उधर, डॉक्टर रविंदर कुमार का कहना है कि उसने कैंप नियमों के तहत लगाया था।
उसके पास वैद्य सर्टिफिकेट भी हैं। 23 दिसंबर को बठिंडा के आयुर्वेदिक डॉ. रविंदर कुमार की ओर से गांव जंगीराणा में 15 दिवसीय कैंप की शुरुआत की गई थी।
इसमें वह महंगे टेस्टों को मात्र तीन सौ रुपये में करता था। वहां पर इसी गांव के रहने वाले भोला सिंह और चंद सिंह ने उक्त कैंप में अपना टेस्ट करवाया। इसको लेकर उक्त दोनों डाक्टरों पर संदेह हुआ।
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इसके बाद दोनों ने अपनी टेस्ट रिपोर्टों को अन्य लोगों की टेस्ट रिपोर्टों के साथ मिलाया तो सभी एक जैसी निकली। इस पूरे मामले की सूचना भोला सिंह व चंद सिंह ने सेहत विभाग और थाना नंदगढ़ पुलिस को दी।
उन्होंने इसे गंभीरता से लेते तुरंत कैंप में छापामारी की। उन्होंने डॉक्टर से दवाओं के बिल मांगे और कैंप लगाने के बारे में आज्ञा पत्र पेश करने को कहा, जो वे मौके पर पेश नहीं कर पाया।
इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर और जिला आयुर्वेदिक अफसर एसएस रोमाणा ने कैंप में पड़ी दवाओं को सील कर कब्जे में ले लिया। डॉक्टर रविंदर कुमार का कहना है कि उसने कैंप लगाने के बारे में सरपंच से आज्ञा ली थी।
उसने कहा कि उसके पास कैंप में दी जाने वाली दवाओं के बिल हैं और डाक्टरी सर्टिफिकेट भी हैं, जो घर पर भूल आया। जिला आयुर्वेदिक अफसर एचएस रोमाणा का कहना है कि दवाओं को जांच के लिए लैब में भेज दिया है।
इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही उक्त डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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इसके बाद उन्होंने कैंप को तुरंत बंद करवाया। साथ ही कैंप में पड़ी डॉक्टर की दवाओं को तुरंत कब्जे में ले लिया। उधर, डॉक्टर रविंदर कुमार का कहना है कि उसने कैंप नियमों के तहत लगाया था।
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उसके पास वैद्य सर्टिफिकेट भी हैं। 23 दिसंबर को बठिंडा के आयुर्वेदिक डॉ. रविंदर कुमार की ओर से गांव जंगीराणा में 15 दिवसीय कैंप की शुरुआत की गई थी।
इसमें वह महंगे टेस्टों को मात्र तीन सौ रुपये में करता था। वहां पर इसी गांव के रहने वाले भोला सिंह और चंद सिंह ने उक्त कैंप में अपना टेस्ट करवाया। इसको लेकर उक्त दोनों डाक्टरों पर संदेह हुआ।
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इसके बाद दोनों ने अपनी टेस्ट रिपोर्टों को अन्य लोगों की टेस्ट रिपोर्टों के साथ मिलाया तो सभी एक जैसी निकली। इस पूरे मामले की सूचना भोला सिंह व चंद सिंह ने सेहत विभाग और थाना नंदगढ़ पुलिस को दी।
उन्होंने इसे गंभीरता से लेते तुरंत कैंप में छापामारी की। उन्होंने डॉक्टर से दवाओं के बिल मांगे और कैंप लगाने के बारे में आज्ञा पत्र पेश करने को कहा, जो वे मौके पर पेश नहीं कर पाया।
इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर और जिला आयुर्वेदिक अफसर एसएस रोमाणा ने कैंप में पड़ी दवाओं को सील कर कब्जे में ले लिया। डॉक्टर रविंदर कुमार का कहना है कि उसने कैंप लगाने के बारे में सरपंच से आज्ञा ली थी।
उसने कहा कि उसके पास कैंप में दी जाने वाली दवाओं के बिल हैं और डाक्टरी सर्टिफिकेट भी हैं, जो घर पर भूल आया। जिला आयुर्वेदिक अफसर एचएस रोमाणा का कहना है कि दवाओं को जांच के लिए लैब में भेज दिया है।
इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही उक्त डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।