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UN -2022 : यूक्रेन संघर्ष, कोविड संकट के बीच वैश्विक आवाज के रूप में उभरा भारत, दुनिया को दिया बड़ा संदेश

Tue, 27 Dec 2022 05:37 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र
पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 27 Dec 2022 05:37 PM IST
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Year Ender 2022, Amid Ukraine conflict, COVID-inflicted crises, India emerges as voice of Global South
Ruchira Kamboj, Ambassador of India to UN - फोटो : ANI

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने दो साल के कार्यकाल के दौरान भारत वैश्विक-दक्षिण की आवाज के रूप में उभरा जिसने यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और अन्य वैश्विक संकटों पर गहन विचार-विमर्श किया। वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के चलते जहां खाद्य एवं ईंधन असुरक्षा अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई, वहीं दुनिया महामारी के चलते बढ़ी असमानताओं से भी जूझती रही। आगामी 31 दिसंबर, 2022 को 15 सदस्यीय परिषद में अपनी गैर-स्थायी सीट छोड़ने से पहले, भारत ने दिसंबर में शक्तिशाली संयुक्त राष्ट्र निकाय की अध्यक्षता की, जिसमें संयुक्त राष्ट्र में देश की पहली महिला स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठीं।

Year Ender 2022, Amid Ukraine conflict, COVID-inflicted crises, India emerges as voice of Global South
Ruchira Kamboj - फोटो : ANI

निर्वाचित गैर-स्थायी सदस्य के रूप में परिषद में भारत के 2021-2022 के कार्यकाल के दूसरे वर्ष में लगभग दो महीने बाद में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 24 फरवरी को पूर्वी यूक्रेन में एक 'विशेष सैन्य अभियान' शुरू किया।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पुतिन से यूक्रेन पर हमला करने से अपने सैनिकों को रोकने और शांति स्थापित करने की अपील की। उन्होंने आक्रमण को संयुक्त राष्ट्र महासचिव के रूप में अपने कार्यकाल का सबसे दुखद क्षण करार दिया।

Year Ender 2022, Amid Ukraine conflict, COVID-inflicted crises, India emerges as voice of Global South
रुचिरा कंबोज, संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी राजदूत। - फोटो : ANI

भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि UNSC के अस्थाई सदस्य के रूप में 2021-22 के कार्यकाल के दौरान एक ऐसा भी समय आया जब भारत को अकेला खड़ा होना पड़ा। इस दौरान उसने उन सिद्धांतों को नहीं छोड़ा, जिन पर वह विश्वास करता था। 

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संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन दूत टी एस तिरुमूर्ति - फोटो : ANI

यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के तत्कालीन दूत टी एस तिरुमूर्ति ने फरवरी में तनाव को तत्काल कम करने के लिए नई दिल्ली के आह्वान को रेखांकित किया और आगाह किया कि स्थिति एक बड़े संकट में तब्दील सकती है।  इस पूरे  वर्ष में परिषद और महासभा के बयानों में, भारत ने शत्रुता और हिंसा को तत्काल समाप्त करने का लगातार आह्वान किया। नई दिल्ली ने इस बात पर जोर दिया कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका है तथा संघर्ष बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचा जाना चाहिए।

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Ruchira Kamboj - फोटो : ANI

अगस्त में न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन का कार्यभार संभालने वाली कंबोज ने जोर देकर कहा कि यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारत ने "एक स्वर में कहा है कि हम शांति के पक्ष में हैं। शांति भी एक पक्ष है और हम कूटनीति एवं संवाद के पक्षधर हैं। हम उन कुछ देशों में से हैं, मैं कहने की हिम्मत करती हूं, जो दोनों पक्षों से बात कर रहे हैं। यूक्रेन संघर्ष के महीनों तक जारी रहने के बीच भारत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इसका प्रभाव केवल यूरोप तक ही सीमित नहीं है। वैश्विक-दक्षिण विशेष रूप से गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना कर रहा है। ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के बारे में बढ़ती चिंताओं के साथ कोविड-19 महामारी से उत्पन्न कठिनाइयां भी बढ़ रही हैं।

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