जलवायु परिवर्तन के लिए छोड़ा स्कूल, अब नोबेल पुरस्कार के लिए हुई नामित, जानें कौन हैं ग्रेटा थनबर्ग
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संयुक्त राष्ट्र में जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर 16 साल की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के सवालों ने दुनियाभर के नेताओं को झकझोर दिया। ग्रेटा ने युवा पीढ़ी की आवाज को दुनिया के सामने रखते हुए कहा था कि हमें समझ आ रहा है कि जलवायु परिवर्तन पर आपने हमारे साथ धोखा किया है और अगर आपने कुछ नहीं किया तो युवा पीढ़ी आपको माफ नहीं करेगी। ग्रेटा के इस भाषण के बाद दुनियाभर में उनकी चर्चा होने लगी। उन्हें जलवायु परिवर्तन की बुलंद करने की आवाज के रूप में देखा जाने लगा।
वर्तमान समय में लोग जलवायु परिवर्तन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, लेकिन ग्रेटा के वैश्विक नेताओं से चुभने वाले सवालों को पूछकर उन्हें इस मुद्दे पर विचार करने को मजबूर किया है। वह अपना विद्यालय छोड़कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारियों का अहसास दिलाने का काम करती हैं। साथ ही ग्रेटा दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को लेकर कार्य करती है। वह अमेरिका से लेकर लंदन और फ्रांस में लोगों को जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करने में लगी हुई हैं।
ग्रेटा थनबर्ग ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अपने विद्यालय से स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट या फ्यूचर फॉर फ्राइडे कैंपेन की शुरुआत की, जो पूरी दुनिया में मशहूर है। इस अभियान के तहत ग्रेटा ने शुक्रवार को विद्यालय जाना छोड़ दिया। वह हर शुक्रवार स्वीडन की संसद के बाहर तख्ती लेकर प्रदर्शन करतीं हुईं दिख जाती हैं। सांसदों के अलावा वह वहां से गुजरने वाले लोगों से दुनिया को बचाने का आग्रह करती हैं।