रूस में बुधवार को द्वितीय विश्वयुद्ध की जीत का जश्न मनाया गया जिसमे भारत की तीनों सेनाओं की टुकड़ी भी शामिल हुईं। 75वीं विजय दिवस परेड में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। साथ ही चीनी सैनिकों और उनके रक्षामंत्री ने भी इसमें भाग लिया।
क्या होता है विजय दिवस?
विजय दिवस द्वितीय विश्व युद्ध के अंत और 1945 में मित्र देशों की जीत का प्रतीक है। जर्मनी के चांसलर और नाजी पार्टी के प्रमुख एडोल्फ हिटलर ने 30 अप्रैल को खुद को गोली मार ली थी। इसके बाद सात मई को जर्मन सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। जिसे अगले दिन औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया, जो नौ मई से प्रभाव में आया। हालांकि अधिकांश यूरोपीय देशों में इसे आठ मई को मनाया जाता है।
रूस क्यों नहीं दूसरे देशों के साथ जश्न मनाता है?
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विजय दिवस परेड
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तत्कालीन सोवियत संघ नहीं चाहता था कि पश्चिम में आत्मसमर्पण हो। वह चाहता था कि इस तरह के महत्वपूर्ण आयोजन में लाल सेना और सोवियत आबादी के योगदान को दर्शाया जाए। सैन्य इतिहासकार एंटनी बीवर लिखते हैं कि स्टालिन अंतिम समारोह को पश्चिम में नहीं होने दे सकता था, इसलिए उसने जोर देकर कहा कि जर्मनों ने बर्लिन में एक और आत्मसमर्पण पर हस्ताक्षर किए। हालांकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने स्टालिन को मनाने की बहुत कोशिश की। उन्होंने तर्क दिया कि सोवियत सेना अभी भी कई क्षेत्रों में जर्मन सेना से लड़ रही है। जर्मन सैनिकों ने बाद में पूर्वी प्रशिया, कौरलैंड प्रायद्वीप, चेकोस्लोवाकिया में आत्मसमर्पण नहीं किया, इसलिए रूस में इसका जश्न नहीं मनाया जा सकता। इसके बाद रूस ने नौ मई को विजय दिवस मनाने का फैसला किया।
अगर नौ मई को विजय दिवस था तो 24 जून को क्यों मनाया जा रहा है?
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आधिकारिक तौर पर नौ मई को ही इस खास परेड का आयोजन होता है लेकिन इस साल कोरोना महामारी के कारण इसका आयोजन दो महीने बाद कराने का निर्णय लिया गया। साल की शुरुआत में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि इस साल की विजय दिवस परेड खास होगी, लेकिन कोविड-19 के फैलने से रोकने के लिए रूस ने मार्च से लॉकडाउन लगा दिया।
इस परेड के लिए नवंबर 2019 में ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता दिया था लेकिन परेड स्थगित होने की वजह से मोदी इसमें शामिल नहीं हो पाए हालांकि उन्होंने नौ मई को ट्वीट कर रूसी राष्ट्रपति और रूसी लोगों को इसकी बधाई दी थी।
24 जून की तारीख इत्तेफाक या कोई और कारण?
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रूस के लिए 24 जून की तारीख भी बहुत महत्वपूर्ण है और इसीलिए इस तारीख को परेड के लिए चुना गया। दरअसल युद्ध जीतने और 9 मई को अपना विजय दिवस होने के बाद, स्टालिन एक सैन्य परेड के साथ जीत का स्मरण करना चाहते थे। 22 जून, 1945 को, उन्होंने आदेश दिया, 'ग्रेट पैट्रियटिक युद्ध में जर्मनी पर जीत की स्मृति में, मैं नियमित सेना, नौसेना और मॉस्को जेल को परेड के लिए नियुक्त करता हूं। इसके बाद विजय दिवस परेड 24 जून, 1945 को मॉस्को के रेड स्क्वायर में आयोजित किया गया था। इसलिए पहली विजय दिवस परेड 24 जून को मॉस्को में हुई। हालांकि, उसके बाद से विजय दिवस की परेड नौ मई को ही होती रही।
परेड में कौन-कौन शामिल हुआ?
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90 मिनट तक चले परेड में भारत-चीन समेत 19 देशों की सेनाओं ने भाग लिया। आयोजन में 64000 से अधिक लोगों के शामिल होने बात कही गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक मॉस्को के रेड स्क्वायर पर 14000 तो देश के 27 इलाकों में करीब 50 हजार सैनिकों ने मार्च किया।