दक्षिण कोरिया के एक गांव में सुबह के साढ़े दस बजे हैं। सीमा पर बसे इस आखिरी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है जिसे एक-आधा बख्तरबंद गाड़ियों कभी-कभार तोड़ देती हैं। योंगाम री गांव के बाद से ही उत्तर और दक्षिण के बीच का डिमिलिट्राइज्ड जोन (विसैन्यीकृत क्षेत्र) शुरू हो जाता है। अनुमान है कि इस जोन में दस लाख से भी ज्यादा लैंडमाइन्स का जाल बिछा हुआ है।
उत्तर कोरिया बॉर्डर की सुरंगें, बंकर और लैंडमाइन
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डर लगता है कि जंग दोबारा न छिड़ जाए
"मेरे पति अब नहीं रहे और बच्चे बड़े होकर दूसरी जगहों पर जाकर बस चुके हैं। पिछले वर्षों में तनाव भी बढ़ा है। अब मैं अपनी जगह तो नहीं छोडूंगी लेकिन हां, रोज दिमाग में ये बात जरूर उठती रहती है कि जंग दोबारा न छिड़ जाए। जाहिर है, डर भी लगता है"।
ली सुन जा इस वृद्धाश्रम में अकेली महिला थीं जो हमसे बात करने को तैयार हुईं। दूसरों ने उत्तर कोरिया के बारे में कोई भी टिप्पणी करने से साफ मना कर दिया क्योंकि इनमें से कई वहीं से आए हैं और कुछ के रिश्तेदार अभी भी वहीं हैं। लेकिन ली सुन जा इस बात से बिल्कुल अनजान हैं कि उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन मिसाइल पर मिसाइल टेस्ट करते जा रहे हैं।
किम के बारे में बातें कम
उन्होंने कहा, "मैं टेलीविजन तो देखती हूं, लेकिन किम के बारे में बहुत कम ही बात होती है। वैसे उत्तर कोरिया हमेशा से जंग-पसंद रहा है। चिंता भी इसी बात की ही है"। योंगाम री जैसे दर्जनों गांव उत्तर कोरिया सीमा के नजदीक बसे हुए हैं। हर गांव में बड़े-बड़े बंकर तैयार हैं और बताया जाता है कि इनमें चले जाने पर परमाणु या रसायन हमले से भी बचा जा सकता है। काफी मिन्नतों के बाद हमें एक बंकर में जाने और फिल्म करने की इजाजत मिली।
बर्फीली सर्द हवाओं से जूझना पड़ता है
लोहे और कंक्रीट की बनी दीवारें चार फीट से ज्यादा मोटी हैं और इन अंडरग्राउंड बंकरों में मोमबत्तियों और टॉर्च के अलावा बिजली और जेनरेटर भी हैं। बड़े-बड़े फ्रिजों में तीन महीने तक के खाने का सामान, कम्बल और बैटरी से चलने वाले शॉर्टवेव रेडियो भी मौजूद हैं जिससे जंग के हालात में बाहरी दुनिया से संपर्क बना रहे।
हर गांव में डिजिटल स्क्रीन और विशालकाय लाउडस्पीकर अलार्म भी हमेशा तैयार रहते हैं। दक्षिण कोरिया की राजधानी से चार घंटे दूर बसे इस इलाके में पहुंचने के लिए बर्फीली हवाएं, खत्म न होने वाली सुरंगें और -10 डिग्री तक के तापमान से निपटना पड़ता है।
इन सभी गांवों का निकटतम शहर है चुनचियों। जैसे-जैसे शहर करीब आता है आम नागरिक कम और फौजी ज्यादा दिखाई पड़ने लगते हैं। पांच लाख से ज्यादा दक्षिण कोरियाई सैनिक इस बॉर्डर पर दिन रात तैनात रहते हैं। बॉर्डर के दूसरी ओर उत्तर कोरिया की तोपों के मुहाने भी इसी ओर मुड़े हुए हैं। इसके बावजूद जो सीमा पर रहते रहे हैं, वे एक इंच भी हिलना नापसंद करते हैं।