विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में महिलाओं को हथियारबंद ट्रेनिंग दे रहा है। अयोध्या में वीएचपी के ट्रेनिंग कैम्प के वीडियो सामने आने के बाद काफी विवाद हुआ था। वीएचपी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन है।
'दुर्गावाहिनी' और 'मातृशक्ति' की हथियारबंद ट्रेनिंग जारी है
पिछले कुछ दिनों से बनारस में वीएचपी की महिला इकाई 'दुर्गावाहिनी' और 'मातृशक्ति' की हथियारबंद ट्रेनिंग जारी है, बताया जा रहा है कि आतंकियों से निबटने की तैयारी के तहत ये ट्रेनिंग दी जा रही है।
वाराणसी के वीएचपी कार्यालय के करीब भारतीय शिक्षा मंदिर नामक स्कूल में कुछ दिनों से चल रहे ट्रेनिंग कैम्प में 11 ज़िलों की 100 लड़कियाँ और महिलाएं शामिल है।
इस ट्रेनिंग का मकसद लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और आतंकवादियों से लोहा लेना है
ट्रेनिंग कैम्प की अधिकारी कमला मिश्रा ने बताया कि "इस ट्रेनिंग का मकसद लड़कियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और आतंकवादियों से लोहा लेना है। उन्होंने बताया महिलाओं को ये ट्रेनिंग इसलिए भी दी जा रही है। क्योंकि आतंकी महिलाओं के हाथो नहीं मरना चाहते है। आतंकी मानते है कि महिला के हाथों मरने के बाद उन्हें जन्नत नही मिलेगी और वो भाग जाते है।
ये ट्रेनिंग घरवालों की अनुमति से ले रही है
ट्रेनिंग के लिए पेशेवर ट्रेनर लगाए गए है। ट्रेनिंग लेने के लिए कुंडा कस्बे से आई रूपाली बताती है। कि इस ट्रेनिंग के जरिए वे आत्मरक्षा के साथ आतंकी से भी निपट सकती है।
एयर गन चलाने की ट्रेनिंग ले रही। वही उसके साथ ट्रेनिंग ले रही मोनी कहती है कि वो ये ट्रेनिंग घरवालों की अनुमति से ले रही है। ताकि इसके बाद वो अपने गाँव पहुँचकर और भी लडकीयों को सिखा सकें।
आज का जो समय चल रहा है। उसके मुताबिक लाठी कराटे और राइफल चलाना आना चाहिए
कौशांबी जिले से आई सुषमा सोनकर ने कहा कि आज का जो समय चल रहा है। उसके मुताबिक लाठी कराटे और राइफल चलाना आना चाहिए। वहीं अधेड़ उम्र की बनारस की प्रतिज्ञा देवी ने बताया कि वो ये ट्रेनिंग आत्मनिर्भर होने के लिए ले रही है। शिविर में ट्रेनर रिचा वर्मा ने बताया कि ऐसा नही है।