पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार को लेकर तख्तापलट की अटकलें इन दिनों मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही हैं। देश के प्रमुख पत्रकारों, संपादकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने खुलकर इन संभावनाओं पर टिप्पणी की है। कुछ का मानना है कि सत्ता के गलियारों में एक बार फिर 'हाइब्रिड सिस्टम' का नया रूप आकार ले रहा है, जबकि सेना समर्थक इसे आंतरिक असंतोष और सैन्य प्रतिष्ठान की रणनीतिक पुनर्रचना से जोड़ रहे हैं।
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पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / एजेंसी
हाइब्रिड सिस्टम पाकिस्तान की राजनीति में वह व्यवस्था है, जिसमें सिविल सरकार दिखावे के लिए होती है, लेकिन असली सत्ता और निर्णय लेने की शक्ति सेना और खुफिया एजेंसियों के पास होती है। कराची से इस्लामाबाद तक पाकिस्तानी समाचार चैनल और अखबारों में यह बहस तेज हो गई है कि क्या शहबाज शरीफ की नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) सरकार अपनी पांच साल की सांविधानिक अवधि पूरी कर पाएगी या नहीं। प्रमुख टीवी चैनल जियो न्यूज, डॉन न्यूज और बोल टीवी जैसे मीडिया प्लेटफॉर्मों ने लगातार बहसों और रिपोर्टों में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
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जियो न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता हामिद मीर ने हाल ही में एक टीवी डिबेट में कहा, जिस तरह से कुछ अदृश्य ताकतें मौजूदा सरकार की निर्णय क्षमता को चुनौती दे रही हैं, उससे स्पष्ट है कि कुछ बहुत बड़ा पक रहा है। यह केवल विपक्ष की नाराजगी नहीं है, बल्कि सत्ता के अन्य केंद्रों की बेचैनी भी सामने आ रही है। वहीं, डॉन न्यूज के राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन ने अपने ताजा लेख में लिखा है कि वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था स्थिरता के बजाय अनिश्चितता की ओर बढ़ रही है। यह केवल तख्तापलट की बात नहीं बल्कि एक नए 'नैरेटिव' को स्थापित करने की कवायद भी हो सकती है।
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सत्ता के गलियारों में बेचैनी क्यों
पाकिस्तान के रक्षा प्रतिष्ठान और सरकार के बीच पिछले कुछ हफ्तों से कई मसलों पर टकराव की खबरें आ रही हैं। आंतरिक सुरक्षा नीति, चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में नई शर्तों और बलूचिस्तान में सैन्य ऑपरेशनों को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। एक वरिष्ठ सुरक्षा विश्लेषक और पूर्व ब्रिगेडियर सईद नजीर का कहना है कि शाहबाज सरकार की आर्थिक नीतियों से लेकर विदेशी कूटनीति तक, कई मामलों में सैन्य नेतृत्व संतुष्ट नहीं दिखता। यदि यह असंतोष गहराया तो हालात 90 के दशक की पुनरावृत्ति की ओर जा सकते है।
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भारत विरोधी नीति के पक्षधर रहे हैं सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर
जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें सेनाध्यक्ष हैं, जिन्हें नवंबर 2022 में पदभार सौंपा गया। वे पहले ऐसे सेनाध्यक्ष हैं जिन्होंने मदीना में हिफ्ज-ए-कुरआन (कुरआन कंठस्थ) किया और फिर सेना की सेवा में उच्च पद तक पहुंचे। मुनीर पाकिस्तानी सैन्य खुफिया एजेंसी एमआई (मिलिट्री इंटेलिजेंस) और आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) दोनों के प्रमुख रह चुके हैं। वे फोर्स कमांड नॉर्दर्न एरिया (एफसीएनए) की कमान भी संभाल चुके हैं। मुनीर को सेना में गुप्तचर नेटवर्क और भारत विरोधी नीति के पक्षधर अधिकारी के रूप में देखा जाता है। उनका कार्यकाल अब तक सिविल सरकार पर अप्रत्यक्ष नियंत्रण और विदेश नीति में सेना की बढ़ती भूमिका के लिए जाना जा रहा है।