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Former Nepal King Fined: नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर जुर्माना क्यों, प्रदर्शन कैसे हुआ हिंसक? जानें

Sun, 30 Mar 2025 08:49 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, काठमांडू
पीटीआई, काठमांडू Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Sun, 30 Mar 2025 08:49 AM IST
सार

नेपाल की राजधानी काठमांडू में शुक्रवार को राजशाही समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था। मामला इतना बिगड़ गया था कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई थी। कई घरों में आग लगा दी गई। इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने कर्फ्यू लगाया था।

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Former Nepal King Gyanendra Shah Fined Over Vandalism During Protests Latest News Update
नेपाल में हिंसा - फोटो : PTI
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नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह पर शनिवार को काठमांडू के नागरिक निकाय ने जुर्माना लगाया। दरअसल, एक दिन पहले नेपाल की राजधानी काठमांडू के कुछ हिस्सों में राजशाही समर्थक प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान सार्वजनिक संपत्ति और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया गया। विरोध प्रदर्शनों के बाद शनिवार सुबह 7 बजे शहर के पूर्वी हिस्से में कर्फ्यू हटा लिया गया। इसके बाद काठमांडू में सामान्य स्थिति लौट आई।

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इससे पहले स्थानीय प्रशासन ने हालात उग्र होने के बाद शुक्रवार शाम 4.25 बजे कर्फ्यू लगा दिया था। इसके बाद तिनकुने-बानेश्वर इलाके में राजशाही समर्थकों ने हिंसक प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और एक राजनीतिक पार्टी के कार्यालय पर भी हमला किया। प्रदर्शन में वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया और दुकानों में लूटपाट की गई। सुरक्षाकर्मियों और राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में एक टीवी कैमरामैन सहित दो लोगों की मौत हो गई और 110 अन्य घायल हो गए।

Former Nepal King Gyanendra Shah Fined Over Vandalism During Protests Latest News Update
नेपाल में हिंसा - फोटो : PTI

विरोध प्रदर्शन ज्ञानेंद्र शाह के आह्वान पर आयोजित किया गया था। इस वजह हिंसक घटनाओं की वजह से हुए नुकसान की भरपाई के लिए काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी (केएमसी) ने पूर्व राजा पर कार्रवाई शुरू की। मेयर बालेंद्र शाह ने काठमांडू के बाहरी इलाके महाराजगंज में निर्मला निवास में ज्ञानेंद्र के आवास पर एक पत्र भेजा, जिसमें उन्हें नुकसान के मुआवजे के रूप में 7,93,000 नेपाली रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया।



पूर्व नरेश को भेजे गए पत्र में केएमसी ने कहा कि पूर्व नरेश के आह्वान पर आयोजित विरोध प्रदर्शन ने महानगर की विभिन्न संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। राजधानी शहर के पर्यावरण पर भी असर पड़ा है। शुक्रवार के आंदोलन के संयोजक दुर्गा प्रसाद ने एक दिन पहले ज्ञानेंद्र शाह से मुलाकात की थी और उन्हें राजशाही और हिंदू राज्य की बहाली की मांग को लेकर आंदोलन करने के निर्देश मिले थे। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्व नरेश का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है और उनके आवास पर सुरक्षा गार्डों की संख्या कम कर दी गई है। हालांकि, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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नेपाल में हिंसा - फोटो : PTI

इससे पहले हिंसक घटनाओं के एक दिन बाद हालात सामान्य होने लगे। शनिवार को सभी परिवहन सेवाएं बहाल कर दी गईं। बाजार खुल गए और जनजीवन सामान्य हो गया। गृह मंत्री रमेश लेखक ने टिंकुने क्षेत्र का दौरा किया, जहां प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को करीब एक दर्जन घरों और करीब एक दर्जन वाहनों में आग लगा दी थी। उन्होंने तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रतिबद्धता जताई। पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सक्रिय रहे राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेताओं धवल शमशेर राणा और रवींद्र मिश्रा समेत 112 लोगों को हिरासत में लिया है। 

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नेपाल में हिंसा - फोटो : PTI

इस बीच सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस की एक उच्चस्तरीय बैठक में कहा गया कि तिनकुने इलाके में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी ज्ञानेंद्र शाह को लेनी चाहिए। नेपाली कांग्रेस के प्रवक्ता प्रकाश शरण महत ने पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों की बैठक के बाद कहा, 'हमने शुक्रवार को राजतंत्र समर्थकों के नाम पर की गई गतिविधियों की समीक्षा की और गृह मंत्री ने घटनाओं का ब्योरा पेश किया, जिसके बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हिंसक गतिविधियों की योजना जानबूझकर अधिनायकवादी शासन लागू करने के उद्देश्य से बनाई गई थी और पूर्व नरेश को इसकी पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'

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नेपाल में हिंसा - फोटो : PTI

नेपाली चैंबर ऑफ कॉमर्स फेडरेशन (एफएनसीसीआई) और नेपाली उद्योग एवं उद्यमिता फेडरेशन ने भी हिंसा की निंदा की। फेडरेशन ने नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग की। दोनों संस्थाओं ने अलग-अलग प्रेस बयान जारी किया और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, 'हालांकि सभी को मांगों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करने और उनमें शामिल होने का अधिकार है, लेकिन उन्हें नागरिकों और उद्योगपतियों के अपने व्यवसाय को जारी रखने के अधिकारों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।' 

फरवरी में लोकतंत्र दिवस के बाद से राजशाही समर्थक सक्रिय हो गए हैं। उस वक्त ज्ञानेंद्र शाह ने कहा था, 'समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारी लें।' उन्होंने काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में रैलियां आयोजित कीं और 2008 में समाप्त की गई 240 साल पुरानी राजशाही को पुनः बहाल करने की मांग की।

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