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Golden Dome: 'अगर मुफ्त में चाहिए गोल्डन डोम तो अमेरिका का 51वां राज्य बने कनाडा', डोनाल्ड ट्रंप का नया पैंतरा

Wed, 28 May 2025 08:19 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 28 May 2025 08:19 AM IST
सार

ट्रंप ने एक सप्ताह पहले 'गोल्डन डोम' प्रणाली की योजना की घोषणा की थी। इसकी लागत लगभग 175 बिलियन डॉलर होगी और यह 2029 में उनके कार्यकाल के अंत तक काम करने की स्थिति में आ जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना के सामने बहुत बड़ी तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां हैं। इसके लक्ष्यों को पाने में जितना खर्च होने का अनुमान लगाया गया है, उससे कहीं ज्यादा खर्च हो सकता है।

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US President Donald Trump Says Golden Dome Free For Canada If IT Joins As 51th US State All Details in Hindi
डोनाल्ड ट्रंप ने गोल्डन डोम मिसाइल शील्ड का एलान किया - फोटो : एएनआई / रॉयटर्स

'गोल्डन डोम' मिसाइल रक्षा प्रणाली के बहाने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा पर निशाना साधा है। उन्होंने एक बार फिर कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की अपनी मंशा दोहराई है। ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि कनाडा उनके प्रस्तावित 'गोल्डन डोम' मिसाइल रक्षा प्रणाली में मुफ्त में शामिल हो सकता है। इसके लिए उसे सिर्फ संयुक्त राष्ट्र अमेरिका का हिस्सा बनना होगा। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो कनाडा को इसका हिस्सा बनने के लिए 61 बिलियन डॉलर खर्च करने होंगे।

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अधिकारियों के साथ ट्रंप की बैठक - फोटो : X @WhiteHouse

ट्रंप ने बार-बार अमेरिका के उत्तरी पड़ोसी को 51वां राज्य बनने का प्रस्ताव देते रहे हैं। कनाडा ने मिसाइल प्रणाली में शामिल होने में रुचि भी व्यक्त की है। 'गोल्डन डोम' का एलान ट्रंप ने पिछले सप्ताह ही किया था। इस दौरान ट्रंप ने कई हथियारों का भी जिक्र किया, जो दुश्मन के हथियारों से लोगों और देश को बचा सकता है।

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर पोस्ट किया, 'मैंने कनाडा से कहा कि जो हमारे शानदार गोल्डन डोम सिस्टम का हिस्सा बनना चाहता है उसे हमारी बात माननी होगी। अगर वे एक अलग राष्ट्र बने रहते हैं तो उन्हें 61 बिलियन डॉलर खर्च करने होंगे। अगर वे हमारे प्रिय 51वें राज्य बन जाते हैं, तो उन्हें शून्य डॉलर खर्च करने होंगे। वे इस प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं!'

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अमेरिका में मिसाइल हमले से बचने के लिए गोल्डन डोम बनाने की तैयारी - फोटो : एएनआई वीडियो ग्रैब

ट्रंप ने यह भी कहा था कि कनाडा मिसाइल प्रणाली में शामिल होने में दिलचस्पी रखता है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी पुष्टि की थी कि उनके देश ने इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय वार्ता की है। नाटो के सदस्य कनाडा और अमेरिका उत्तरी अमेरिकी एयरोस्पेस रक्षा कमान (NORAD) के माध्यम से महाद्वीपीय रक्षा में भागीदार हैं। हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद आशंका जताई जताई जा रही है कि यह योजना कनाडा के साथ ट्रंप द्वारा शुरू किए गए तनाव को और बढ़ाने वाली है।

कार्नी ने इस महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस का दौरा करने के दौरान कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बनाने के ट्रंप के आह्वान को विनम्रतापूर्वक लेकिन दृढ़ता से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनका देश कभी भी बिक्री के लिए नहीं है। हालांकि, कनाडाई प्रधानमंत्री और ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ओटावा पर लगाए गए टैरिफ को लेकर कुछ तनाव को कम करने का प्रयास किया।

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अमेरिका में गोल्डन डोम बनवाने की योजना - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / एक्स@व्हाइट हाउस

क्या है गोल्डन डोम, जिसकी दुनिया में फिर छिड़ी चर्चा?
डोनाल्ड ट्रंप ने संसद में दिए अपने भाषण में अमेरिका के 40वें राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के नाम का जिक्र किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 में अमेरिका में कूटनीतिक रक्षा पहल (स्ट्रैटेजिक डिफेंस इनीशिएटिव) का एलान किया गया था। इसे मुख्य तौर पर रूस से आने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा के लिए तैयार किया जाना था। हालांकि, अमेरिका इस प्रोजेक्ट को लागू करने में सफल नहीं हो पाया। अब करीब 42 साल बाद डोनाल्ड ट्रंप ने फिर ऐसे ही सिस्टम को तैयार करने पहल की है।

दरअसल, सैटेलाइट्स रडार और इंटरसेप्टर्स के जरिए मिसाइलों या दूसरे हवाई खतरों की लोकेशन की जानकारी अलग-अलग बिंदुओं पर भेजती है। ऐसे में अमेरिका की तरफ आने वाले किसी भी खतरे को सबसे पहले देश से दूर ही अमेरिकी सैन्य बेस या नौसैन्य पोत के करीब ही खत्म करने की कोशिश की जाती है। यहां से जरूरी मिसाइलों या लड़ाकू विमानों के जरिए हवाई खतरों को नष्ट किया जाता है।

यहीं से गोल्डन डोम सिस्टम का अगला काम यहीं से शुरू होता है। दरअसल, इस्राइल के सिस्टम का ही उदाहरण ले लें तो इस सिस्टम में तीन हिस्से होते हैं। पहला- रडार, दूसरा- कमांड पोस्ट और तीसरा- लॉन्चर। 

  • रडार के जरिए डोम सिस्टम यह तय करता है कि आसमान में दिख रही चीज कितना बड़ा खतरा है, इसकी क्या गति है और इसे खत्म करने के लिए किस गति की और कितनी ताकत की जरूरत होगी। 
  • यह पूरी जानकारी गोल्डन डोम के दूसरे हिस्से के तौर पर काम कर रहे कमांड पोस्ट को लगातार मिलती है, जो कि खतरे को भांपकर लॉन्चर को सिग्नल देता है और यह लॉन्चर यूनिट इंटरसेप्टर मिसाइलों के जरिए हमला करता है और खतरे को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर देता है।  
  • लॉन्चर दो तरह के होते हैं- स्टेश्नरी और मोबाइल। स्टेश्नरी एक ही जगह पर फिटेड सिस्टम होता है और मोबाइल को एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जाता है। मिसाइलें हवा में सीधे ऊपर की तरफ छोड़ी जाती हैं। उसके बाद ये अपने निशाने को ढूंढते हुए दिशा बदल लेती है। ये मिसाइलें हीट या मोशन सेंसिंग होती हैं और हवा में ही खतरों को नष्ट कर देती है। वहीं कमांड पोस्ट से इस पूरी प्रकिया पर नजर रखी जाती है।

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अमेरिका का गोल्डन डोम। - फोटो : अमर उजाला
कुछ अन्य खासियत भी जान लीजिए
  • रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका अपने गोल्डन डोम सिस्टम के लिए कई तरह की मिसाइलों को रखने की योजना बना रहा है। यह मिसाइलें जरूरत के हिसाब से छोटे या लंबे रेंज की मिसाइलों को खत्म कर देंगी। इतना ही नहीं हाइपरसोनिक गति से आने वाली मिसाइलों के लिए अलग तरह के हथियार और फ्लेयर तैयार किए जा सकते हैं।
  • बताया जाता है कि फिलहाल अमेरिका गोल्डन डोम में पहले से मौजूद मिसाइल रक्षा प्रणालियों को एकीकृत कर इस्तेमाल करेगा। जैसे कि पैट्रियट डिफेंस सिस्टम और उन्नत रडार। हालांकि, समय के साथ गोल्डन डोम की क्षमता को बढ़ाने का काम किया जाएगा। 

इस्राइल के मुकाबले काफी अलग होगा अमेरिका का गोल्डन डोम
इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम छोटे से देश की रक्षा के लिए बना है। वहीं अमेरिका क्षेत्रफल में इस्राइल से 430 गुना और जनसंख्या में 35 गुना बड़ा है। यानी अमेरिका में इस्राइल जैसे डिफेंस सिस्टम को तैनात करना बड़ी चुनौती होगी। 

इस्राइल ने अमेरिका के सहयोग से राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम को ध्यान में रखते हुए आयरन डोम को रॉकेट हमलों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया है। इस्राइल साल 2011 से इस प्रणाली का इस्तेमाल कर रहा है। इस्राइल की सेना और सरकार दावा करती है कि आयरन डोम दुनिया का सबसे विकसित एयर डिफेंस सिस्टम है और इसका सक्सेस रेट 90 प्रतिशत से भी ज्यादा है।


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