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वारंट और बिना वारंट गिरफ्तारी में क्या होता है मुख्य अंतर? जानिए इससे जुड़ी जरूरी कानूनी नियम

Mon, 07 Sep 2026 08:01 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Mon, 07 Sep 2026 08:01 PM IST
सार

Police Arrest Powers India: अक्सर लोगों के मन में ये सवाल होता है कि वारंट और बिना वारंट के गिरफ्तारी में क्या अंतर होता है। असल में इन दोनों के बीच का अंतर अपराध की गंभीरता पर निर्भर करता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Warrant vs Without Warrant Arrest: Legal Differences and Individual Rights Explained in hindi
वारंट और बिना वारंट गिरफ्तारी - फोटो : AI

Arrest with Warrant vs Without Warrant: भारत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है। हालांकि, भारतीय कानून में गिरफ्तारी की प्रक्रिया को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है पहला वारंट के साथ गिरफ्तारी और दूसरा बिना वारंट के गिरफ्तारी। अक्सर लोग इन दोनों स्थितियों को लेकर भ्रमित रहते हैं कि पुलिस कब सीधे किसी व्यक्ति को हिरासत में ले सकती है और कब उसे अदालत से अनुमति की जरूरत होती है। 



किसी भी नागरिक को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसलिए आइए इस लेख में आसान भाषा में समझते हैं कि वारंट और बिना वारंट गिरफ्तारी में क्या मुख्य अंतर हैं।

Warrant vs Without Warrant Arrest: Legal Differences and Individual Rights Explained in hindi
पुलिस स्टेशन पर कितनी देर थाने में बैठा सकती है पुलिस - फोटो : AI

अपराध की प्रकृति 

  • इसको समझने के लिए आपको सबसे पहले कॉगनिजेबल और नॉन कॉगनिजेबल का मतलब के बारे में समझना पड़ेगा। 
  •  कॉगनिजेबल मतलब गंभीर अपराध जैसे हत्या, डकैती, चोरी या दुष्कर्म। इन संगीन मामलों में पुलिस बिना वारंट के तुरंत गिरफ्तार कर सकती है।
  • वहीं  नॉन कॉगनिजेबल मतलब कम गंभीर अपराध। इसमें मारपीट, मानहानि या छोटे-मोटे विवादों में पुलिस को अदालत से वारंट लेना अनिवार्य होता है।
  • कानून के तहत अपराध की गंभीरता ही तय करती है कि वारंट की जरूरत है या नहीं।
Warrant vs Without Warrant Arrest: Legal Differences and Individual Rights Explained in hindi
अदालत की मंजूरी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया - फोटो : अमर उजाला

अदालत की मंजूरी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया

  • अगर वारंट के साथ गिरफ्तारी होती है तो उसमें मजिस्ट्रेट या कोर्ट लिखित आदेश जारी करता है, जिसे पुलिस गिरफ्तार होने वाले व्यक्ति को दिखाती है।
  • वहीं बिना वारंट गिरफ्तारी में पुलिस अधिकारी मौके की गंभीरता, सबूत और संदेह के आधार पर तुरंत फैसला लेता है।
  • अगर मामला बिना वारंट का नहीं है, तो पुलिस को गिरफ्तार करने का कारण और वारंट दिखाना पड़ता है।
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Warrant vs Without Warrant Arrest: Legal Differences and Individual Rights Explained in hindi
गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार और जमानत - फोटो : Adobe Stock

गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकार और जमानत

  • दोनों ही मामलों में पुलिस को आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है।
  • गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को गिरफ्तारी का कारण जानने और अपने वकील से बात करने का पूरा कानूनी अधिकार है।
  • कम गंभीर मामलों में पुलिस स्टेशन से ही जमानत मिल सकती है, जबकि संगीन मामलों में कोर्ट ही फैसला करता है।
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Warrant vs Without Warrant Arrest: Legal Differences and Individual Rights Explained in hindi
नागरिकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें - फोटो : Adobe Stock
नागरिकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
  • पुलिस से हमेशा गिरफ्तारी का लिखित कारण और उनकी पहचान आईडी जरूर पूछें।
  • पुलिस की यह जिम्मेदारी है कि वह आरोपी के किसी एक परिजन को गिरफ्तारी की तुरंत जानकारी दे।
  • हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद आरोपी को अपनी मेडिकल जांच कराने का पूरा अधिकार होता है।
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