Indian Railways Rules for Goods: सफर लंबी दूरी का हो या फिर छोटी दूरी का, भारतीय रेलवे रोजाना एक बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन करता है। पैसेंजर ट्रेन से लेकर शताब्दी ट्रेनों जैसी कई अन्य ट्रेनों के जरिए लोग अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। इसके लिए बस आपको ट्रेन टिकट लेना होता है और फिर आप जनरल कोच से लेकर एसी क्लास तक में (जैसा टिकट लिया है उस हिसाब से) सफर कर सकते हैं।
पर क्या आप जानते हैं की कोई रेलवे के सामान का पर्सनल कामों के लिए इस्तेमाल करता है या उसे चुराता है जैसे, रेलवे का लोहा तो इसको लेकर क्या कोई नियम है? शायद नहीं, लेकिन आपके लिए ये जानना जरूरी हो जाता है क्योंकि बीते दिनों एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। तो चलिए जानते हैं रेलवे को चुराने को लेकर क्या कोई नियम है...
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रेलवे का सामान चोरी करने पर क्या हो सकता है?
- फोटो : AdobeStock
पहले मामला जान लें
- दरअसल, बीते दिनों उत्तर प्रदेश के औरैया में एआरटीओ ने एक ऐसी ट्रैक्टर-ट्रॉली को पकड़ा जिसमें रेलगाड़ी के पहिए लगे हुए थे। जांच में पता चला कि ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन कृषि कार्यो के लिए राजस्थान का था, लेकिन ट्रॉली का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। ऐसे में एआरटीओ द्वारा इस गाड़ी का 10 लाख 6 हजार रुपये का चालान किया गया।
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क्या कहता है रेलवे का नियम?
- इस बात से लगभग हर कोई अवगत है देश के किसी न किसी कोने में रेलवे का कोई न कोई काम चल ही रहा होता है। कहीं पटरी बिछ रही होती है तो कहीं पर पुल का निर्माण आदि चलता ही रहता है। ऐसे में रेलवे का सामान वहां पर या सड़क किनारे रखा रहता है, लेकिन यहां जान लें अगर कोई व्यक्ति इस सामान को चुराता है तो उसके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। साथ ही इसमें जुर्माने का भी प्रावधान है।
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रेलवे का सामान चोरी करने पर क्या हो सकता है?
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- मान लीजिए कि अगर कोई एक व्यक्ति या एक से ज्यादा लोग मिलकर रेलवे का लोहा चुराते हैं और फिर उसे कहीं बेच देते हैं, तो ऐसी स्थिति में भारतीय रेलवे का नियम कहता है कि इस स्थिति में दोनों व्यक्तियों (सामान खरीदने वाला और बेचने वाला) के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है जिसमें जुर्माने से लेकर जेल भेजने तक का प्रावधान है।
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कितना जुर्माना और कितनी जेल?
- सड़क किनारे या कहीं अन्य जगहों पर रखे भारतीय रेलवे के सामान से छेड़छाड़ करने पर या इसे चुरना पर आपके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। रेलवे प्रॉपर्टी एक्ट 1966 के तहत ये कार्रवाई की जा सकती है जिसमें आपको कम से कम 5 वर्ष तक की जेल हो सकती है। वहीं, इसमें जुर्माना 1 हजार रुपये से शुरू होकर मामले के हिसाब से अलग-अलग लगाया जाता है।