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बागेश्वर धाम: माइंड रीडिंग क्या है? कैसे जान सकते हैं आप भी मन की बातें? जानिए पूरा मनोविज्ञान

यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Sat, 21 Jan 2023 02:02 PM IST
क्या और कैसे होती है माइंड रीडिंग?
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Bageshwar Dham: कहते हैं इस संसार में जो भी घटित हो रहा है, उसके पीछे कुछ न कुछ वजह होती है। हर व्यक्ति अलग-अलग समय पर अलग-अलग बातें सोचता है, उसके मन के विचार अलग-अलग हो सकते हैं आदि। पर दिमाग में चल रही इन बातों को सामने वाला व्यक्ति जान पाए, ऐसा मुश्किल नजर आता है। लेकिन इन दिनों बागेश्वर धाम वाले बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इसी बात को लेकर काफी चर्चा में हैं क्योंकि उनके भक्तों की मानें तो वो बिना किसी से पूछे उनके मन में चल रहे विचारों को बता देते हैं, लोगों के मन की बात पढ़ लेते हैं, उनके घर में कौन सी चीजें कहां रखी है ये बता देते हैं, बिना सामने वाले व्यक्ति के बताए उसका मोबाइल नंबर तक बाबा बता देते हैं? ऐसे में आपका सोचना लाजमी है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? क्या बाबा सच में चमत्कारी हैं या फिर इसके पीछे माइंड रीडिंग छुपी है? तो चलिए जानते हैं कि अगर ये माइंड रीडिंग है, तो फिर ये क्या है और होती कैसे है? आप अगली स्लाइड्स में इस बारे में जान सकते हैं...
क्या और कैसे होती है माइंड रीडिंग?
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क्या होता है माइंड रीडिंग?
  • दरअसल, माइंड रीडिंग का मतलब होता है बिना जाने सामने वाले व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है, ये जानना। बिना किसी साधनों के इस्तेमाल के दूसरे व्यक्ति के दिमाग के विचार को जानना ही माइंड रीडिंग कहलाता है।
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कैसे पढ़ सकते हैं सामने वाले व्यक्ति के मन की बात?
  • इस क्रिया में व्यक्ति अलर्ट रहकर और अपना दिमाग खुला रखकर सामने वाले व्यक्ति की फीलिंग को समझता है। कुछ मनोवैज्ञानिक तरकीबें और सलाह के जरिए दूसरे व्यक्ति के दिमाग को प्रभावी ढंग से पढ़ा जाता है। मनोवैज्ञानिक इसे साहनुभूति सटीकता कहते हैं, जिससे ये संकेत मिलते हैं कि सामने वाले व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है इसका थोड़ा बहुत अंदाजा मिल जाता है।
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  • माइंड रीडिंग करने वाले लोग इसका निरंतर अभ्यास करते हैं। कहा जाता है कि ये लोग दिन में कम से कम दो से तीन बार ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि सामने वाले व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है। ऐसे लोगों के अंदर एकाग्रता होती है, जो किसी का दिमाग पढ़ने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती है।
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क्या विज्ञान पर है आधारित?
  • कई लोग ये समझते हैं कि शायद माइंड रीडिंग विज्ञान पर आधारित है। पर यहां ये भी समझना जरूरी है कि माइंड रीडिंग सटीक विज्ञान पर आधारित नहीं है। जानकार मानते हैं कि आप हर बार सही नहीं हो सकते कि सामने वाले व्यक्ति के मन में क्या चल रहा है। हो सकता है कि आप गलत भी हो, क्योंकि यहां पर आप केवल प्रासंगिक सुरागों के आधार पर ही अनुमान लगाते हैं।
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