करीब आधी सदी के इंतजार के बाद इंसान दोबारा चांद की सतह पर कदम रखने की तैयारी कर रहा है। नासा का आर्टेमिस 3 मिशन 2027 के मध्य तक लॉन्च होने की संभावना है। नासा के नए प्लान के अनुसार, आर्टेमिस 3 केवल पृथ्वी की निचली कक्षा में एक प्रदर्शन मिशन होगा। यह मिशन 2027 के मध्य में लॉन्च होकर स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स की डॉकिंग और प्रणालियों का परीक्षण करेगा। वहीं आर्टेमिस 4 मिशन के अंतर्गत इंसान को 2028 में चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है।
यह मिशन कई मायनों में ऐतिहासिक होने की बात कही जा रही है। इस मिशन के अंतर्गत पहली बार एक महिला और एक अश्वेत अंतरिक्ष यात्री को चंद्रमा पर भेजा जाएगा। यह न सिर्फ एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि अंतरिक्ष अन्वेषण में विविधता और समावेशन का भी प्रतीक बनेगा। इस मिशन के अंतर्गत एस्ट्रोनॉट को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक कोई मानव नहीं पहुंचा है।
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Artemis Mission
- फोटो : NASA
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले Artemis II मिशन अप्रैल 2026 में सफलतापूर्वक पूरा किया गया था। इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की परिक्रमा की, लेकिन वे सतह पर नहीं उतरे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य तकनीकी परीक्षण और मानवयुक्त उड़ान की तैयारी को जांचना था, ताकि आगे आने वाले मिशन सुरक्षित और सफल हो सके।
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Artemis Mission
- फोटो : NASA
Artemis 2 की सफलता के बाद अब Artemis 3 को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह मिशन 50 साल बाद चांद पर मानव लैंडिंग कराएगा। अंतिम बार साल 1972 में अपोलो मिशन के दौरान इंसान ने चांद पर कदम रखा था। इस बार खास बात यह है कि लैंडिंग चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर होगी, जहां पानी की बर्फ मिलने की संभावना है। यह भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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Artemis Mission
- फोटो : एलन मस्क/एक्स
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्टेमिस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चांद तक पहुंचना नहीं है। नासा वहां पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति स्थापित करना चाहता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि चांद पर बेस बनाकर भविष्य में मंगल ग्रह की यात्रा को आसान बनाया जा सकता है। इस मिशन की मदद से नई तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा, जो सुदूर अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए जरूरी हैं।
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- फोटो : एक्स
विशेषज्ञों की मानें तो आर्टेमिस-3 मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक बड़ा मोड़ साबित होने वाला है। इससे न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी, बल्कि वैश्विक सहयोग भी बढ़ेगा। आने वाले वर्षों में यह मिशन मानवता के अंतरिक्ष भविष्य को तय करने में एक महत्वपूर्म भूमिका निभाने वाली है।