भारतीय एथलेटिक्स में अपनी पहचान बनाने वाली हरमिलन बैंस अब एक नए मंच पर नजर आने वाली हैं। एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीत चुकीं हरमिलन ने लोकप्रिय रियलिटी शो 'रोडीज' में एंट्री की है। खेल के मैदान पर अपनी रफ्तार और दमदार प्रदर्शन से पहचान बनाने वाली हरमिलन अब इस शो में अलग-अलग चुनौतियों का सामना करती दिखेंगी। वह शो में टीम 'न्यू जी' की जज गुरबानी के स्क्वॉड में शामिल हुई हैं। इस शो में गुरबानी के अलावा नेहा धूपिया, प्रिंस नरूला, निखिल चिनप्पा, अभिषेक मलहान और बशीर जज हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी लोकप्रियता है और वह खुद को 'द क्वीन' के नाम से पहचान देती हैं।
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कौन हैं हरमिलन बैंस, जो रोडीज में हुईं शामिल?: एशियाड में जीत चुकीं दो रजत, 'क्वीन' के पैर पर शेर का है टैटू
Sun, 01 Nov 2026 03:11 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 01 Nov 2026 03:11 PM IST
सार
एशियाई खेलों में 800 और 1500 मीटर दौड़ में दो रजत पदक जीतने वाली भारतीय एथलीट हरमिलन बैंस ने रियलिटी शो 'रोडीज' में नई पारी शुरू की है। एथलेटिक्स परिवार से आने वाली हरमिलन चोट और मानसिक संघर्ष से उबरकर वापसी कर चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वह 'द क्वीन' नाम से मशहूर हैं।
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हरमिलन बैंस
- फोटो : Twitter
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हरमिलन बैंस
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एथलेटिक्स में जीते दो एशियाई खेलों के रजत पदक
हरमिलन बैंस ने 2022 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने महिलाओं की 800 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किए। वह एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं। 1500 मीटर में उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी रहा, जिसे बाद में तोड़ दिया गया।
हरमिलन की खास बात यह है कि उनके परिवार में एथलेटिक्स की मजबूत विरासत रही है। उनकी मां माधुरी बैंस भी लंबी दूरी की धाविका थीं। उन्होंने 2002 के बुसान एशियाई खेलों में 800 मीटर में रजत पदक जीता था। इसके अलावा 2004 में पाकिस्तान में आयोजित एसएएफ खेलों में 800 और 1500 मीटर में स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। उनके पिता अमनदीप सिंह ने 1996 के एसएएफ खेलों में 1500 मीटर में रजत पदक जीता था।
हरमिलन ने बचपन से ही अपनी मां के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया था। वह 800 मीटर की तैयारी मां और 1500 मीटर की ट्रेनिंग पिता के साथ करती थीं। उन्होंने सीबीएसई स्कूल गेम्स से दौड़ना शुरू किया और 2018 में 12वीं कक्षा में 800 और 1500 मीटर में राष्ट्रीय सीबीएसई खेलों के रिकॉर्ड बनाए।
हरमिलन बैंस ने 2022 में हांगझोऊ एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने महिलाओं की 800 मीटर और 1500 मीटर दौड़ में रजत पदक अपने नाम किए। वह एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं। 1500 मीटर में उनके नाम राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी रहा, जिसे बाद में तोड़ दिया गया।
हरमिलन की खास बात यह है कि उनके परिवार में एथलेटिक्स की मजबूत विरासत रही है। उनकी मां माधुरी बैंस भी लंबी दूरी की धाविका थीं। उन्होंने 2002 के बुसान एशियाई खेलों में 800 मीटर में रजत पदक जीता था। इसके अलावा 2004 में पाकिस्तान में आयोजित एसएएफ खेलों में 800 और 1500 मीटर में स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे। उनके पिता अमनदीप सिंह ने 1996 के एसएएफ खेलों में 1500 मीटर में रजत पदक जीता था।
हरमिलन ने बचपन से ही अपनी मां के साथ अभ्यास करना शुरू कर दिया था। वह 800 मीटर की तैयारी मां और 1500 मीटर की ट्रेनिंग पिता के साथ करती थीं। उन्होंने सीबीएसई स्कूल गेम्स से दौड़ना शुरू किया और 2018 में 12वीं कक्षा में 800 और 1500 मीटर में राष्ट्रीय सीबीएसई खेलों के रिकॉर्ड बनाए।
हरमिलन बैंस
- फोटो : Twitter
चोट से वापसी कर एशियाड में रचा इतिहास
हरमिलन का सफर आसान नहीं रहा। 2021 में उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और उस साल कोई व्यक्तिगत रेस नहीं गंवाई। हालांकि, इसके बाद घुटने की सर्जरी के कारण उन्हें करीब 10 महीने तक ट्रैक से दूर रहना पड़ा। वापसी के बाद उन्होंने 2022 एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद हरमिलन ने मानसिक संघर्ष का भी सामना किया। उन्होंने बताया था कि उस दौर में वह अवसाद जैसी स्थिति में पहुंच गई थीं और उनके मन में आत्महत्या के विचार भी आए थे। हालांकि, उन्होंने मुश्किल समय से बाहर निकलकर खेल में वापसी की।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, 'मेरा संदेश है कि अपने खेल का आनंद लें और बहुत ज्यादा तनाव न लें। ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद मैं बहुत तनाव में थी और लगभग अवसाद में चली गई थी। मेरे मन में आत्महत्या करने, सब कुछ छोड़ने और अपना शहर छोड़कर भाग जाने जैसे विचार आने लगे थे। माता-पिता से कहना चाहती हूं कि अपने बच्चों को वही करने दें, जो वे करना चाहते हैं। युवाओं से भी कहना चाहती हूं कि अपना खेल या पेशा बदलने में कभी देर नहीं होती। बस आप जो कर रहे हैं, उसका आनंद लें।'
हरमिलन का सफर आसान नहीं रहा। 2021 में उन्होंने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और उस साल कोई व्यक्तिगत रेस नहीं गंवाई। हालांकि, इसके बाद घुटने की सर्जरी के कारण उन्हें करीब 10 महीने तक ट्रैक से दूर रहना पड़ा। वापसी के बाद उन्होंने 2022 एशियाई खेलों में दो रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।
2024 पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद हरमिलन ने मानसिक संघर्ष का भी सामना किया। उन्होंने बताया था कि उस दौर में वह अवसाद जैसी स्थिति में पहुंच गई थीं और उनके मन में आत्महत्या के विचार भी आए थे। हालांकि, उन्होंने मुश्किल समय से बाहर निकलकर खेल में वापसी की।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, 'मेरा संदेश है कि अपने खेल का आनंद लें और बहुत ज्यादा तनाव न लें। ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाने के बाद मैं बहुत तनाव में थी और लगभग अवसाद में चली गई थी। मेरे मन में आत्महत्या करने, सब कुछ छोड़ने और अपना शहर छोड़कर भाग जाने जैसे विचार आने लगे थे। माता-पिता से कहना चाहती हूं कि अपने बच्चों को वही करने दें, जो वे करना चाहते हैं। युवाओं से भी कहना चाहती हूं कि अपना खेल या पेशा बदलने में कभी देर नहीं होती। बस आप जो कर रहे हैं, उसका आनंद लें।'
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हरमिलन बैंस
- फोटो : Twitter
'द क्वीन' नाम से सोशल मीडिया पर लोकप्रिय
हरमिलन अपने खेल के अलावा अपने बेबाक अंदाज और स्टाइल के लिए भी चर्चा में रहती हैं। उन्होंने अपनी दाईं जांघ पर शेर का टैटू बनवाया है, जिसे वह ताकत, साहस और निडरता से जोड़ती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लाखो फॉलोअर्स हैं। उनका यूजरनेम भी 'द क्वीन' है और वह नियमित रूप से अपनी तस्वीरें और गतिविधियां साझा करती हैं।
'रोडीज' में उनकी एंट्री खेल के मैदान से बाहर एक नई चुनौती है। शो में प्रतिभागियों को शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती परखने वाले कई टास्क से गुजरना होता है। हरमिलन के एथलेटिक्स अनुभव को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस नए मंच पर कैसा प्रदर्शन करती हैं।
हरमिलन अपने खेल के अलावा अपने बेबाक अंदाज और स्टाइल के लिए भी चर्चा में रहती हैं। उन्होंने अपनी दाईं जांघ पर शेर का टैटू बनवाया है, जिसे वह ताकत, साहस और निडरता से जोड़ती हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लाखो फॉलोअर्स हैं। उनका यूजरनेम भी 'द क्वीन' है और वह नियमित रूप से अपनी तस्वीरें और गतिविधियां साझा करती हैं।
'रोडीज' में उनकी एंट्री खेल के मैदान से बाहर एक नई चुनौती है। शो में प्रतिभागियों को शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती परखने वाले कई टास्क से गुजरना होता है। हरमिलन के एथलेटिक्स अनुभव को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस नए मंच पर कैसा प्रदर्शन करती हैं।