संघर्ष की भट्टी में जब कोई तपता है तब वह मैरीकॉम बनता है। हिंदुस्तान के उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर के एक बेहद गरीब परिवार में 1 मार्च 1983 को मैरीकॉम का जन्म हुआ। खेतो में काम करते हुए जिस लड़की ने अपना बचपन बिताया आज उसी ने छठी बार विश्व महिला बॉक्सिंग जीतकर इतिहास रच दिया।
मैरीकॉम ने रचा इतिहास, छह बार विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली पहली महिला मुक्केबाज
खेल में हिस्सा लेना उनके पिता को मंजूर नहीं था, लेकिन 2005 में ओनलर कॉम से शादी के बाद मैरी ने खेल जगत में कदम रखा। पति के सपोर्ट से उन्होंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू की। इसे उनका जुनून ही कहा जाएगा कि कुछ साल के भीतर ही उन्होंने देश का परचम ऊंचा कर दिया।
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मैरी ने 2007 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन मां बनने के बाद भी उनके प्रोफेशनल एटिट्यूड में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई। मां बनने के बाद उनका जुनून और भी बढ़ गया जिसके चलते उन्होंने वर्ल्ड टाइटल का खिताब हासिल किया।
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मैरीकॉम को 2008 में मैग्नीफिशेंट मैरीकॉम की उपाधि से नवाजा गया। देश का नाम गर्व से ऊंचा करने वाली नारी शक्ति की मिसाल पर एक फिल्म भी बन चुकी है। फिल्मी पर्दे पर प्रियंका चोपड़ा ने उनकी जिंदगी को बखूबी जिया।
2006 में मैरीकॉम को पद्मश्री, 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया। अब शनिवार को 48 किग्रा भारवर्ग में यूक्रेन की हाना ओखोता को हराकर 35 वर्षीय मैरी छह पीले तमगे जीतने वाली दुनिया की पहली मुक्केबाज बन गईं।