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मैरीकॉम: खेतों में काम करते हुए गुजारा बचपन, संघर्ष की कहानी पर बनी बॉलीवुड फिल्म

Sat, 24 Nov 2018 06:03 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 24 Nov 2018 06:03 PM IST
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Success story of World Boxing championship gold medalist MC Mary Kom

संघर्ष की भट्टी में जब कोई तपता है तब वह मैरीकॉम बनता है। हिंदुस्तान के उत्तर पूर्वी राज्य मणिपुर के एक बेहद गरीब परिवार में 1 मार्च 1983 को मैरीकॉम का जन्म हुआ। खेतो में काम करते हुए जिस लड़की ने अपना बचपन बिताया आज उसी ने छठी बार विश्व महिला बॉक्सिंग जीतकर इतिहास रच दिया।



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Success story of World Boxing championship gold medalist MC Mary Kom

खेल में हिस्सा लेना उनके पिता को मंजूर नहीं था, लेकिन 2005 में ओनलर कॉम से शादी के बाद मैरी ने खेल जगत में कदम रखा। पति के सपोर्ट से उन्होंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू की। इसे उनका जुनून ही कहा जाएगा कि कुछ साल के भीतर ही उन्होंने देश का परचम ऊंचा कर दिया। 

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Success story of World Boxing championship gold medalist MC Mary Kom

मैरी ने 2007 में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन मां बनने के बाद भी उनके प्रोफेशनल एटिट्यूड में किसी तरह की कोई कमी नहीं आई। मां बनने के बाद उनका जुनून और भी बढ़ गया जिसके चलते उन्होंने वर्ल्ड टाइटल का खिताब हासिल किया।

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Success story of World Boxing championship gold medalist MC Mary Kom

मैरीकॉम को 2008 में मैग्नीफिशेंट मैरीकॉम की उपाधि से नवाजा गया। देश का नाम गर्व से ऊंचा करने वाली नारी शक्ति की मिसाल पर एक फिल्म भी बन चुकी है। फिल्मी पर्दे पर प्रियंका चोपड़ा ने उनकी जिंदगी को बखूबी जिया।

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Success story of World Boxing championship gold medalist MC Mary Kom

2006 में मैरीकॉम को पद्मश्री, 2009 में उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से भी नवाजा गया। अब शनिवार को 48 किग्रा भारवर्ग में यूक्रेन की हाना ओखोता को हराकर 35 वर्षीय मैरी छह पीले तमगे जीतने वाली दुनिया की पहली मुक्केबाज बन गईं।

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