ऐसे कम ही सितारें हैं जिन्होंने पैसे का लालच किए बगैर अपने उसूलों को आगे रखा और उन विज्ञापनों को नकार दिया जो या तो गलत संदेश देते हैं या जिन्हें वे निजी जिंदगी में भी अहमियत नहीं देते। कुछ ने लोगों के प्रभाव में आकर ये फैसला लिया तो कुछ ने अपने दिल की आवाज सुनी।
उसूलों के लिए छोड़ दिए विज्ञापन
कुछ ही दिन पहले महेंद्र सिंह धोनी का नाम रियल स्टेट फर्म आम्रपाली मामले में फंसा था जब लोगों ने धोनी से सोशल मीडिया पर अपील की थी कि या तो वे कंपनी के साथ अपना रिश्ता तोड़ दें या उन्हें घर दिलाएं। धोनी ने भी वादा किया था कि वे बिल्डर से बात करें। लेकिन अब धोनी ने अम्रपाली के ब्रैंड अंबैसेडर के पद से इस्तीफा दे दिया है। धोनी ने अपने चाहने वालों को ध्यान में रखते हुए ये कमद उठाया।
उसूलों के लिए छोड़ दिए विज्ञापन
पिछले साल ही कंगना रनौत ने एक फेयरनेस क्रीम का विज्ञापन करने से मना कर दिया था जबकि उन्हें 2 करोड़ रुपए का ऑफर था। उन्होंने साफ कहा था कि वो ऐसे किसी उत्पाद का विज्ञापन नहीं करेंगी जो गोरेपन का प्रचार करता हो क्योंकि गेंहुआ रंग भी उतना ही खूबसूरत होता है। गोरापन ही खूबसूरती की पहचान नहीं है।
उसूलों के लिए छोड़ दिए विज्ञापन
सचिन तेंदुलकर को शराब के ब्रैंड का विज्ञापन करने के लिए 20 करोड़ दिए जा रहे थे फिर भी उन्होंने मना कर दिया क्योंकि उन्होंने कसम खाई है कि वे कभी धूम्रपान के उत्पादों का प्रचार नहीं करेंगे। सचिन को इस फैसले के लिए बहुत तारीफें भी मिली थीं।
उसूलों के लिए छोड़ दिए विज्ञापन
अमिताभ बच्चन ने एक टीवी विज्ञापन करने से मना कर दिया था क्योंकि वो दहेज प्रथा से जुड़ा हुआ था। इसी तरह एक बार जब उनसे स्कूल की एक लड़की ने पूछा था कि वे पेप्सी का प्रचार क्यों करते हैं जबकि उसके घर वाले और टीचर पेप्सी को 'जहर' बताते हैं। अमिताभ को ये बात दिल तक छू गई थी और उन्होंने उसके बाद से पेप्सी के विज्ञापन करने से मना कर दिया था।