भारत में मंगलवार को नई सनसनी फैली। इनका नाम है सौरभ चौधरी, जिन्होंने एशियाई खेल 2018 के तीसरे दिन भारत की झोली में तीसरा गोल्ड मेडल डाला। सिर्फ 16 साल के सौरभ ने 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में गजब की परिपक्वता दिखाई और पहली बार सीनियर स्तर पर उपलब्धि हासिल की।
चौधरी का अंतिम-2 में मुकाबला जापान के मत्सुदा से था। जापानी निशानेबाज का दो में से पहला शॉट 8.9 पर जाकर लगा, जिससे भारतीय निशानेबाज को लाभ मिला। सौरभ ने इस मौके को जाने नहीं दिया और दोनों हाथों से लपकते हुए देश को खुशियां दी। भारत के दो निशानेबाजों ने पहली बार मौजूदा एशियाई खेलों में एक ही स्पर्धा में एकसाथ खेलते हुए दो पदक जीते।
16 वर्षीय चौधरी ने फाइनल में 240.7 का स्कोर किया और शीर्ष पर रहते हुए गोल्ड मेडल जीता। जापान के मत्सुदा टोमोयुकी को सिल्वर मेडल मिला। मत्सुदा का फाइनल स्कोर 239.7 रहा। भारत के अभिषेक वर्मा 219.3 के स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
सौरभ चौधरी की कहानी बेहद रोचक है। मेरठ के निशानेबाज ने तीन साल पहले ही इस खेल को चुना। एशियन गेम्स की तैयारी के लिए सौरभ ने सीनियर निशानेबाजों के साथ अभ्यास किया, जिसका फायदा उन्हें रोमांचक फाइनल में मंगलवार को मिला। चलिए आपको बताते हैं कि भारत को मौजूदा एशियाई खेलों में निशानेबाजी में पहला गोल्ड दिलाने वाले सौरभ चौधरी की जिंदगी के बारे में:
सौरभ चौधरी का जन्म 11 मई 2002 को जनपद मेरठ के कलीना गांव में किसान परिवार में हुआ। 13 साल की उम्र में सौरभ ने फैसला किया कि वह शूटिंग में ही अपना करियर बनाएंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धमाकेदार आगाज किया और दुनिया को बता दिया कि भविष्य में वह सितारा निशानेबाज कहलाएंगे। चौधरी ने पिछले एक साल में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। वह राष्ट्रीय स्तर पर तो सफल हुए ही। जूनियर अंतरराष्ट्रीय सर्किट में भी उनका प्रदर्शन काबिल-ए-तारीफ रहा।