उफ... एक शानदार सफर का ऐसा अंजाम। रफ्तार की दुनिया के सबसे बड़े शोमैन जमैका के उसेन बोल्ट को कैरियर की अंतिम रेस में पोडियम भी नसीब नहीं हो सका। जो धावक ट्रैक पर बिजली की गति सा दौड़ता था उसे लंगड़ाते हुए ट्रैक को अलविदा कहना पड़ा। स्वर्णिम विदाई के जश्न की जगह लंदन के ओलंपिक स्टेडियम में एक महानायक की पीड़ा का दर्द झलक रहा था। दर्शक भावुक थे और बोल्ट अवाक। बोल्ट अब अपने गोल्डन शूज टांग देंगे लेकिन ट्रैक की दुनिया को ऐसा दूसरा चैंपियन ढूंढने में शायद बरसों लग जाएं। बोल्ट की यह नाकामी एक सबक भी दे गई कि जीत किसी की बपौती नहीं है। एक चैंपियन की ऐसी विदाई और नियति दुखद है लेकिन सच तो यही है कि जो एथलीट पूरे कैरियर में पदकों की झड़ी लगाता रहा वो अंतिम रेस में फिनिश लाइन भी न छू सका। तमाम उम्र शिखर पर रहे बोल्ट का सफर अंतिम रेस में सिफर पर आकर थम गया।
उसेन बोल्ट: सिफर पर थमा स्वर्णिम सफर, जानिए जीवन से जुड़ी 5 रोचक बातें
एथलेटिक्स की दुनिया में एक दशक तक तहलका मचाने वाले जमैका के सुपरस्टार एथलीट उसेन बोल्ट का अपनी अंतिम रेस में स्वर्ण से विदाई की हसरत अधूरी रह गई। चोट की वजह से वह 4 गुणा सौ मीटर रिले की अपनी अंतिम रेस को फिनिश भी नहीं कर सके। रिले रेस में जमैका की चौकड़ी के लिए चौथे चरण में दौड़ रहे रफ्तार के सौदागर बोल्ट ने योहान ब्लैक से बैटन पकड़ी और लंबे डग भरते हुए तेजी से फिनिश लाइन की ओर दौड़े लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव के कारण लड़खड़ाने लगे और दर्द से कराहते हुए ट्रैक पर ही गिर गए। एक शानदार सफर का अंत दुख और पीड़ा के साथ हुआ। नतीजे में उनके नाम के आगे लिखा था रेस पूरी नहीं की। उनकी स्वर्णिम विदाई की आस लेकर ओलंपिक स्टेडियम में आए 60 हजार से ज्यादा दर्शकों को भी मायूसी हुई। ब्रिटेन की टीम ने 37.47 सेकंड के साथ स्वर्ण, अमेरिका (38.01) ने रजत और जापान की टीम ने 38.4 सेंकड के साथ कांस्य पदक जीता।
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पांच साल यही लगाई थी गोल्डन हैट्रिक
पांच साल पहले इसी स्टेडियम में बोल्ट ने तीन स्वर्ण पदक जीतकर गोल्डन हैट्रिक लगाई थी। मांसपेशियों में खिंचाव के बाद गिरे बोल्ट धीरे-धीरे उठे और फिर घुटनों के बल बैठकर हताशा में अपना माथा पकड़ लिया। कुछ क्षण वह बिल्कुल अकेले थे। इस बीच उनके साथी योहान ब्लैक, जूलियन फोर्टे और उमर मैक्ल्याड ने आकर उन्हें संभाला। यह भी एक विडंबना थी कि रेस के बादशाह को ट्रैक से उठाकर फिर खड़ा करने में साथियों ने मदद की। यह नजारा उस रेस से भी खराब था जब सौ मीटर की रेस में इस विश्व रिकॉर्डधारी को अमेरिका के जस्टिन गैटलिन और क्रिस्टियन कोलमैन ने पछाड़कर कांस्य पदक के लिए विवश कर दिया था।
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स्कूल में भी सबसे तेज धावक थे बोल्ट
बोल्ट ने सबसे पहली बार अपनी तेज दौड़ने की क्षमता स्कूल में ही दिखाई थी। वेल्डनसिया प्राइमरी स्कूल के छात्र रहे बोल्ट बारह साल की उम्र में पूरे स्कूल में 100 मीटर रेस के सबसे तेज धावक थे। बोल्ट जब छोटे थे, तब अपना काफी समय भाई के साथ गली में क्रिकेट और फुटबॉल खेलने में बिताते थे। बोल्ट ने एक बार कहा था कि जब वह छोटे थे, तब खेलों के अलावा उनका मन कहीं और नहीं लगता था।
उसेन बोल्ट: सिफर पर थमा स्वर्णिम सफर, जानिए जीवन से जुड़ी 5 रोचक बातें
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उसैन बोल्ट
- फोटो : Getty Images
क्रिकेट कोच ने किया था गति को नोटिस
विलियम निब्ब मेमोरियल हाई स्कूल में बोल्ट के क्रिकेट कोच ने पिच पर उनकी गति को नोटिस किया और उनसे ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में अपना कैरियर बनाने की सलाह दी। पूर्व ओलंपिक स्प्रिंट एथलीट पाब्लो मैकनील और ड्वेन जारेट ने बोल्ट को शुरुआती कोचिंग दी और एथलेटिक्स में अपनी ऊर्जा को सुधारने पर फोकस करने के लिए प्रेरित किया। बोल्ट ने 2001 में वार्षिक हाई स्कूल चैंपियनशिप में पदक जीता। उन्होंने 200 मीटर रेस 22.04 सेकंड में पूरी कर सभी को हैरान कर दिया। इसी स्कूल से दिग्गज स्प्रिंटर माइकल ग्रीन भी पढ़े थे।