सैखोम
मीराबाई चानू ने नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाते हुए स्नैच में कुल 194 किग्रा - 85 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 109 किग्रा वजन उठाकर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता। चानू वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स में
कर्णम मल्लेश्वरी के बाद गोल्ड मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय भरत्तोलक हैं। लेकिन उन्हें यह मेडल जीतने के लिए एक बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी थी... आइए एक नजर डालते हैं उनके चैंपियन बनने के सफर पर
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मीराबाई चानू
- फोटो : Facebook
चानू को इस गोल्ड मेडल को अपने और देश के नाम करने के लिए एक बड़ी कुर्बानी देनी पड़ी। दरअसल 22 नवंबर को चानू की बड़ी बहन शाया की शादी थी लेकिन चानू अपनी बहन की शादी छोड़ अमेरिका के आनाहिम में आयोजित वेटलिफ्टिंग के वर्ल्ड चैंपियनशिप में देश के लिए खेल रही थीं।
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मीराबाई चानू
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मेडल जीतने के बाद चानू ने कहा कि यह गोल्ड मेडल मेरी बहन के लिए सबसे बेस्ट गिफ्ट है। मैं उसकी शादी में शामिल नहीं हो पाई क्योंकि मैं यह चैंपियनशिप में हिस्सा लेने अमेरिका आई हुई थी। मैं रियो ओलंपिक की उन बुरी यादों को भी मिटाना चाहती थी, जहां मैं मेडल जीतने में कामयाब नहीं हो पाई थी।
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मीराबाई चानू
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मेरे घर में मेरे इस फैसले से सभी नाराज थे कि मैं बहन की शादी छोड़कर कॉम्पिटिशन में जा रही हूं। मैं उन सभी के गुस्से को समझ सकती हूं। मैंने कहा था कि मैं उन सभी के लिए ये कॉम्पिटिशन जीततकर आऊंगी और अपनी प्यारी बहन के लिए गोल्ड मेडल जीतूंगी। मैंने अपना वादा पूरा किया। मेरी मां ने मुझसे कहा कि हमें तुम पर नाज है अब पूरा गांव तुम्हारे स्वागत का इंतजार कर रहा है।
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बता दें कि चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा इवेंट में हिस्सा लिया था। उन्होंने पहले 85 किग्रा तक का भार सफलतापूर्वक उठाया और इसके बाद 109 किग्रा भार भी उठा लिया। उन्होंने देश को इस कॉम्पिटिशन में दूसरा गोल्ड मेडल दिलाया। देश को पहला गोल मेडल 1995 में मल्लेश्वरी ने दिलाया था।