एशियाई खेलों की मिशाल रिले का रविवार को यहां हुआ आयोजन अव्यवस्थित, लापरवाही और उलझन भरा रहा। इसके चलते हॉकी खिलाड़ी पीआर श्रीजेश, सरदार सिंह, निशानेबाज जीतू राय और टेबल टेनिस खिलाड़ी शरत कमल सहित कई खिलाड़ियों को मीडिया की बस में सवार होना पड़ा। हालांकि खिलाड़ियों ने इसकी कोई शिकायत नहीं की और सहजता से पत्रकारों की एक बस में सवार हो गए। इसका कारण शायद बस से राष्ट्रीय स्टेडियम से इंडिया गेट आने-जाने की कम दूरी होना था।
एक शीर्ष खिलाड़ी ने कहा, 'स्थिति थोड़ी अव्यवस्थित थी, लेकिन ठीक है। हमें शिकायत नहीं है।' एशियाई खेलों की शुरुआत 1951 में हुई थी और तब ये नई दिल्ली में ही आयोजित हुए थे। तब राष्ट्रीय स्टेडियम में पहली बार खेलों की मशाल प्रज्वलित की गई थी।
यह समारोह महत्वपूर्ण था क्योंकि राष्ट्रीय स्टेडियम से मशाल प्रज्वलित होने के बाद 2018 के एशियाई खेलों का 18,000 किलोमीटर का सफर शुरू हो गया। एशियाई खेल इंडोनेशिया में 18 अगस्त से दो सितंबर के बीच आयोजित होंगे। इंडोनेशिया की महान बैडमिंटन खिलाड़ी और 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली सुसी सुशांति ने भारत की पांच बार की विश्व विजेता मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम को मशाल सौंपी, जिन्होंने थोड़ी देर मशाल थामे दौड़ने के बाद उसे दूसरे भारतीय खिलाड़ियों को सौंप दिया।
श्रीजेश, सरदार, जीतू, कमल के अलावा मनिका बत्रा मशाल लेकर दौड़ने वाले खिलाड़ियों में शामिल थै। मशाल अब इंडोनेशिया जाएगी जहां उसे 18 जुलाई को मध्य जावा के प्राचीन हिंदू मंदिर, प्रमबनन में पवित्र अग्नि से मिलाया जाएगा। इसके बाद मशाल देश के 18 प्रांतों के 54 शहरों से गुजरेगी और आखिर में उद्घाटन समारोह के लिए 18 अगस्त को जकार्ता पहुंचेगी।
समारोह में भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरिंदर बत्रा एवं महासचिव राजीव मेहता, एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के आजीवन उपाध्यक्ष वेई गिझोंग एवं राजा रणधीर सिंह और खेल सचिव राहुल भटनागर भी मौजूद थे। खेल मंत्री राज्यर्धन सिंह राठौड़ किसी अन्य महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता के कारण समारोह में शामिल नहीं हुए। पूर्व खेल मंत्री विजय गोयल भी नहीं आएं जिन्हें राठौड़ की अनुपस्थिति में समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था।