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अर्जुन अवॉर्ड पाने वाली खिलाड़ी घूम रही बेरोजगार, सरकार से मदद की आस

Tue, 25 Sep 2018 07:25 PM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला Updated Tue, 25 Sep 2018 07:25 PM IST
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savita punia is happy getting arjuna award but hopeful for the job
सविता पूनिया

भारत की 28 बरस की बेहतरीन और मुस्तैद ओलंपिक हॉकी गोलरक्षक सविता पूनिया कहती हैं वह खुशकिस्मत हैं कि उन्होंने पहले ही बार अर्जुन अवॉर्ड के लिए आवेदन किया और यह अवॉर्ड मिल गया। 

savita punia is happy getting arjuna award but hopeful for the job
सविता पूनिया

हरियाणा में सिरसा जिले के जोड़कां गांव की भारतीय हॉकी टीम की उपकप्तान सविता पूनिया ने मंगलवार को अर्जुन अवॉर्ड के लिए नवाजे पर कहा, 'मुझे अर्जुन अवॉर्ड अपनी पूरी भारतीय टीम की 18 लड़कियों, पूरे स्पोर्ट स्टाफ और परिवार से मिले सहयोग के कारण ही मिल पाया है। हॉकी दरअसल टीम गेम है। हॉकी में बिना पूरी टीम के सहयोग से किसी भी टीम की कामयाबी और जीत मुमकिन नहीं है। मैंने हॉकी में आज अर्जुन अवॉर्ड सहित जो कुछ भी पाया पूरी टीम के सहयोग के कारण ही पाया।' 

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सविता पूनिया

'मेरी हॉकी में कामयाबी में परिवार के समर्थन का बेहद अहम योगदान है। हरियाणा सरकार से मैं पिछले नौ बरस से नौकरी की गुहार कर रही हूं, लेकिन मुझे केवल आश्वासन मिला, नौकरी नहीं। हरियाणा सरकार की ओर से बार-बार यही कहा गया कि पॉलिसी बन रही है। मुझे अर्जुन अवॉर्ड मिलने की बेहद खुशी है, लेकिन हरियाणा सरकार से आज भी नौकरी का  इंतजार है।'  
'मुझे नहीं मालूम कब हरियाणा सरकार की पॉलिसी बनेगी और कब मुझे नौकरी मिलेगी। मुझे हॉकी में मैंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में हॉकी कोच के लिए आवेदन किया है। खेल मंत्री राज्यर्धन सिंह राठौड़ ने जल्द से जल्द नौकरी देने का भरोसा दिलाया है।'

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सविता पूनिया

उन्होंने कहा, 'मां बीमार हो अमूमन लड़कियों को घर का काम संभालने की नसीहत दी जाती है। मैंने जब खेलना शुरू किया तो मेरी मां लीलावती देवी को गठिया हो गया था। घर में  दिक्कत थी कि काम कौन करे?  मैं हॉकी खेलती थी और मेरी मां कतई नहीं चाहती घर के काम में उलझ कर रह जाउं। उन्होंने मुझे हॉकी खेलने के लिए बाहर भेज दिया। मेरे पिता महेन्द्र सिंह फॉर्मेसिस्ट हैं और उन्होंने मेरी मां का साथ दिया। यदि कोई मुझसे पूछे की मैं हॉकी मैं इस मुकाम तक कैसे तो मैं अपने दादा स्वर्गीय रणजीत सिंह के कारण ही यहां तक पहुंची।' 

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सविता पूनिया - फोटो : hindustan times

'दादा रणजीत सिंह ही चाहते थे कि मैं हॉकी खेलूं और मैंने हॉकी खेल कर उनका ही सपना पूरा किया। मुझे आज जब अर्जुन अवॉर्ड दिया गया तो मुझे सबसे ज्यादा कमी अपने दादा रणजीत सिंह की अखर रही है। मैंने भारत के लिए 2009 में खेलना शुरू कर दिया था और तब मेरे दादा जिंदा थे। मेरे दादा का 2013 में निधन हो गया लेकिन मैं हर कामयाबी में उन्हें याद रखती हूं।' 

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