फ्रांस के डिफेंडर सैमुअल उमटीटी मंगलवार को बेल्जियम के खिलाफ फीफा विश्व कप 2018 के पहले सेमीफाइनल में गोल करके अचानक सुर्खियों का केंद्र बन गए हैं। उमटीटी ने मैच के 51वें मिनट में हेडर के जरिए गोल किया और बेल्जियम के पहली बार फीफा विश्व कप के फाइनल में पहुंचने के सपने को तोड़ दिया। एक गोल से सुपरस्टार बने उमटीटी का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा है। यही नहीं उनका जन्म भी फ्रांस में नहीं हुआ है। चलिए उनकी पर्सनल लाइफ और संघर्ष के बारे में आपको बताते हैं:
सैमुअल वेस उमटीटी का जन्म 14 नवंबर 1993 को कैमरून की राजधानी याउंदे में हुआ। उमटीटी का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा। माता-पिता गरीबी से जूझ रहे थे, जिसे देखते हुए उन्होंने सैमुअल को अपने रिश्तेदार के साथ फ्रांस भेज दिया ताकि वह अच्छे से अपना जीवन व्यतीत कर सके। तब सैमुअल उमटीटी की उम्र महज दो साल थी। फ्रांस में उमटीटी कैमरून के आप्रवासी परिवार में बड़े हुए। इसी साल यानी 1995 में रोजर मिलर और उनकी कैमरून टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया, जिससे फ्रांस में रह रहे आप्रवासी कैमरूनीयन को हौसला मिला।
कैमरून फुटबॉल टीम के सफल होने का असर फ्रांस में आप्रवासी लोगों पर भी पड़ा और आगे चलकर उसे सैमुअल उमटीटी और पोल पोग्बा जैसे बेहतरीन फुटबॉलर मिले। फ्रांस ने भी अपने नियमों में संशोधन किया और आप्रवासी लोगों को खेलने की इजाजत दी। वैसे, उमटीटी को बचपन में मां कहती थी कि हमेशा कड़ी मेहनत करना क्योंकि इसका फल जरूर मिलता है। बस, फिर क्या था, उमटीटी ने इस गुरूमंत्र को हमेशा अपनाया और आज वह सफलता के शिखर पर हैं।
उमटीटी ने 2012 में पेशेवर करियर में डेब्यू किया और उन्होंने लियोन क्बल का प्रतिनिधित्व किया। 2015-16 में उमटीटी को लियोन के फैंस ने प्लेयर ऑफ द सीजन करार दिया। इसका असर यह रहा कि उमटीटी को स्पेन के दिग्गज क्लब बार्सिलोना ने अपने साथ जोड़ लिया। उमटीटी ने बार्सिलोना के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया और अपने आप को टीम का स्थापित डिफेंडर बनाया।
उमटीटी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर स्ट्राइकर की थी। इसके बाद वह सेंटर डिफेंडर बने और अब वह अपने करियर के अंतिम मैच तक इसी पोजीशन पर खेलते रहेंगे। उमटीटी ने मंगलवार को बेल्जियम के खिलाफ भी बेहतरीन डिफेंडर होने का नमूना पेश किया था। उन्होंने एडन हेजार्ड के खतरनाक किक पर अपना पैर अड़ाकर गोल टाल दिया था।