वैसे तो नौ ग्रहों का अपना अलग-अलग महत्व होता है और ये ग्रह समय-समय पर अपना घर की बदलते रहते हैं। अधिकतर ग्रह किसी एक राशि में ज्यादा से ज्यादा एक वर्ष तक रहता है, लेकिन शनि ग्रह का किसी दूसरी राशि में जाना महापरिवर्तन कहलाता है और इस बार ये महापरिवर्तन 26 अक्टूबर को हो रहा है। शनि दोपहर 3 बजे पूर्ण रूप से धनु राशि में प्रवेश करेंगे और जनवरी 2020 तक इसी राशि में गोचर करेंगे।
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दरअसल शनि किसी एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं और ये समय पूरा होने के बाद वे राशि परिवर्तन करते हैं। ऐसे में 12 राशियों के राशि चक्र को पूरा करने में शनि को तीस वर्ष का समय लग जाता है। शनि का राशि परिवर्तन एक बड़ी घटना माना जाता है, क्योंकि दूसरी राशियों पर चल रही साढ़ेसाती और ढ़ैय्या भी प्रभावित होते हैं। अगर किसी पर शनि की नजर पड़ जाए तो उसकी हंसती खेलती जिंदगी भी बर्बाद हो जाती है। इस राशि परिवर्तन से किसी पर ढैय्या आएगी तो किसी पर साढ़ेसाती। अधिकतर लोग इस वजह से शनिदेव को क्रूर मानते हैं, जबकि ऐसा नहीं हैं। मां लक्ष्मी ने भी शनिदेव से यही सवाल किया था, तब शनि देव ने बताया कि वे किन लोगों को दंड देते हैं।
जब मां लक्ष्मी ने शनि देव से पूछा कि आखिर क्यों लोग आपको क्रूर मानते हैं और कहते हैं कि आप किसी के साथ भी रियायत नहीं करते? तब शनिदेव ने कहा कि मुझे तीनों लोकों का दंडाधिकारी बनाया गया है और अगर मैं रियायत करने लगा तो फिर प्रशासन कैसे चलेगा?
आज के समय में शनि देव को क्रर माना जाता है, जबकि वे हकीकत में दंडाधिकारी है, न की क्रर शासक। शनि देव कभी भी गलत को सहन नहीं करते और जो व्यक्ति गलत होता है, उसे दंडित भी करते हैं। यहां तक कि गलत होने पर उन्होंने देवताओं को भी नहीं छोड़ा।
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आज कल माना जाने लगा कि शनि देव सबका काम ही बिगाड़ने वाले हैं। हर कोई उनकी नजर से बचने की कोशिश करता है। उनका दिन शनिवार है। इसी वजह से ज्यादातर लोग तो इस दिन को भी अशुभ मानते हैं, जबकि हकीकत में वे गलत और सही का निर्णय करते हैं और गलत के लिए उसी अनुसार सजा भी तय करते हैं। शनि देव की अदालत में कोई भी अमीर गरीब नहीं होता। जो भी गलत होता है, उसे शनि देव दंड भी देते हैं।