Ravidas Jayanti 2025: संत रविदास की जयंती के अवसर पर पढ़ें उनके अनमोल दोहे, जीवन भर आएंगे काम
माघ पूर्णिमा के दिन संत रविदास जयंती मनाई जाती है। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को बिना भेदभाव के प्रेम और एकता की सीख दी, जिसके कारण वे भक्ति मार्ग के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
1. "करम बंधन में बन्ध रहियो फल की ना तज्जियो आस
कर्म मानुष का धर्म है सत् भाखै रविदास।।"
अर्थ: हमें अपने कर्म को पूरी निष्ठा के साथ करते रहना चाहिए, और उसके फल की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। कर्म करना मनुष्य का धर्म है, और फल प्राप्त होना भाग्य पर निर्भर करता है।
2. "कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा।
वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।"
अर्थ: भले ही लोग अलग-अलग नामों से ईश्वर की पूजा करें, परंतु सत्य यही है कि सभी धार्मिक ग्रंथों में एक ही ईश्वर की महिमा का गुणगान किया गया है।
3. "रविदास जन्म के कारनै होत न कोउ नीच
नकर कूं नीच करि डारि है ओछे करम की कीच"
अर्थ: मनुष्य की महानता या निम्नता उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से तय होती है। अच्छे कर्म व्यक्ति को ऊँचा उठाते हैं, जबकि बुरे कर्म उसे नीचे गिराते हैं।
4. "ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन
पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन।।"
अर्थ: किसी व्यक्ति की पूजा केवल उसके जन्म के आधार पर नहीं करनी चाहिए, बल्कि उसके गुणों को देखकर ही उसका सम्मान करना चाहिए।