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चाणक्य नीति: बुरे समय में सच्चे मित्र की भांति साथ निभाती हैं ये चीजें
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Wed, 30 Jun 2021 07:14 AM IST
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आचार्य चाणक्य
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आचार्य चाणक्य गुप्त साम्राज्य के संस्थापक और चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। ये अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ विद्वान थे। ये राजनीति व कूटनीति में कुशल थे व एक महान अर्थशास्त्री थे। इन्होंने मनुष्य के जीवन को सुखमय बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखें हैं। इनमें से नीतिशास्त्र की बातें आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उस काल में हुआ करती थी। आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में मनुष्य के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं, धन, रिश्ते, मित्रता, शत्रु, सामाजिक व्यवहार, कार्यक्षेत्र आदि के विषय में बहुत महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। लोगों को नीतिशास्त्र के कुछ सुझाव बहुत ही कठिन लगते हैं और कई बार लोग इनसे सहमतत भी नहीं होते हैं लेकिन इस बात को ध्यान में रखना आवश्यक है कि चाणक्य की नीतियां कड़वी अवश्य हैं लेकिन यह आपको जीवन की सत्यता से अवगत कराती हैं। आचार्य चाणक्य ने नीतिशास्त्र में तीन ऐसी चीजों के बारे में बताया है जो बुरे वक्त में भी व्यक्ति का सच्चे मित्र की तरह साथ देती हैं। तो आइए जानते हैं कि कौन सी हैं वे चीजें।
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आचार्य चाणक्य
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विपरीत परिस्थितियों में धन है सच्चा मित्र-
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को धन कमाने के साथ उसे सही प्रकार से व्यय और निवेश भी करना चाहिए। बुरे समय में धन ही आपका सच्चा मित्र है, इसलिए धन को सदैव सोच-समझकर खर्च करना चाहिए और बुरे समय के लिए धन बचाकर रखना चाहिए। धन विपरीत परिस्थितियों से निकलने में आपकी सहायता करता है। जो लोग अपने धन को सही प्रकार से नहीं रखते हैं या फिर दूसरों के पास रखते हैं, समय आने पर वे लोग सदैव पछताते हैं।
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आचार्य चाणक्य
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ज्ञान है सच्चा मित्र-
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जहां धन भी व्यक्ति के काम नहीं आता है वहां पर ज्ञान ही आपका सच्चा मित्र है। ज्ञान के बल पर व्यक्ति विपरीत से विपरीत परिस्थितियों से निकलने में भी सक्षम होता है। ज्ञान व्यक्ति के जीवन पर आए संकट को भी दूर करने की क्षमता रखता है, इसलिए व्यक्ति को जहां से भी जैसे भी ज्ञान मिले सीखना चाहिए। ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता है। वह आपके जीवन में कभी न कभी अवश्य काम आता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान यदि शत्रु से भी प्राप्त हो तो उसे भी ग्रहण करना चाहिए।
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चाणक्य नीति
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अन्न का भंडारण-
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जब किसी क्षेत्र में अकाल पड़ा हो तो अन्न व्यक्ति का सच्चा मित्र होता है, इसलिए अन्न का भंडारण करके रखना भी आवश्यक होता है। यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि आवश्यकता से अधिक नहीं लेकिन जरुरत के अनुसार अन्न का भंडारण करना सही रहता है। बुरे समय में यदि आपके पास धन न हो या फिर जिस क्षेत्र में अकाल पड़ा हो तो अन्न ही आपके प्राण बचाता है।
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