Chanakya Niti: जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। आगे जाने वाले हमेशा अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेते हैं। परंतु पीछे रह जाने वाले अक्सर तनाव से घिर जाते हैं। हालांकि इसका अर्थ है यह नहीं कि वह नाकाम है। दरअसल, कई बार दिन रात कड़ी मेहनत के बाद भी मनचाहे परिणामों की प्राप्ति नहीं होती हैं। ऐसे में मन में लगातार नकारात्मकता का भाव बना रहता है। ये भाव व्यक्ति की सोच को प्रभावित व उसकी कार्यक्षमता पर गहरा असर डालता है। ऐसी परिस्थिति में स्वयं को सकारात्मक बनाए रखना अपने में बड़ी चुनौती हैं।
Chanakya Niti: जब बार-बार मिलने लगे असफलता, तो आचार्य चाणक्य की इन बातों का रखें ध्यान
Chanakya Niti: जीवन में हर व्यक्ति सफलता पाने की रेस में दौड़ता है। इस दौरान कुछ लोग आगे, तो कुछ पीछे रह जाते हैं। आगे जाने वाले हमेशा अपने लक्ष्यों को पूरा कर लेते हैं।
प्रभूतं कार्यमल्पं वा यन्नरः कर्तुमिच्छति ।
सर्वारम्भेण तत्कार्यं सिंहादेकं प्रचक्षते ।।
सिंहादेकं बकादेकं शिक्षेच्चत्वारि कुक्कुटात्।
वायसात्पञ्च शिक्षेच्च षट्शुनस्त्रीणि गर्दभात् ।।
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक का अर्थ है कि इसांन को हमेशा शेर और बगुले से एक-एक, मुर्गे से चार, कौए से पांच, कुत्ते से छह और गधे से तीन गुण सीखने चाहिए। उनका मानना है कि अगर आप इस संसार में प्रत्येक वस्तु और प्रत्येक प्राणी ये कुछ-न कुछ सीखते हैं, तो जीवन में सफलता, उन्नति और विकास आसानी से किया जा सकता है।
।। नास्ति देहिनां सुखदुःखाभावः ।।
मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् ।
मन्त्रेण रक्षयेद् गूढं कार्य चापि नियोजयेत् ।।
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