आचार्य चाणक्य का नाम आज के समय में भी श्रेष्ठ विद्वानों में गिना जाता है। इन्होंने अपने जीवन में विपरीत से विपरीत परिस्थितियों का सामना किया फिर भी कभी हार नहीं मानी और धैर्य को बनाए रखा। इन्होंने अपनी बुद्धि और नीतियों का प्रयोग करके अपने शत्रु घनानंद का नाश करके चंद्रगुप्त को साधारण बालक से मौर्य साम्राज्य का सम्राट बनाया। ये चंद्रगुप्त के महामंत्री बने किंतु फिर भी ये राजसी ठाट-बाट से दूर एक कुटिया में साधारण जीवन व्यतीत करते थे। ये कई विषयों में परांगत थे। इसी कारण ये विष्णु गुप्त और कौटिल्य के नाम से भी विख्यात थे। इनके लिखे गए ग्रंथ 'नीति शास्त्र' की बातें जीवन के पहलुओं को बहुत करीब से स्पर्श करती हैं और जीवन से जुड़ी समस्याओं का हल करने में सहायक हैं। नीतिशास्त्र में धन, तरक्की, विवाह, व्यापार, नौकरी, मित्रता और शत्रुता समेत कई बातों का जिक्र किया गया है। चाणक्य नीति में कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं, जिनका त्याग कर देना ही हितकर होता है अन्यथा व्यक्ति को मान-सम्मान की हानि उठानी पड़ती है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे कार्य।
चाणक्य नीति: अगर करते हैं ये कार्य तो उठानी पड़ेगी मान-सम्मान की हानि
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 08 Jun 2021 09:39 AM IST
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