आचार्य चाणक्य कुशाग्र बुद्धि के श्रेष्ठ विद्वान थे। ये किताबी ज्ञान में तो निपुण थे ही साथ में इनकी व्यवहारिक समझ भी बहुत अच्छी थी। ये अर्थशास्त्र, कूटनीति और राजनीति में कुशल थे। अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ होने के कारण इन्हें कौटिल्य भी कहा जाता था। इन्होंने अपने जीवन में बहुत ही विपरीत परिस्थितियों का सामना किया लेकिन कभी हार नहीं मानी और अपनी बुद्धि एवं नीतियों का प्रयोग करते हुए नंद वंश का नाश करके चंद्रगुप्त को गद्दी पर बिठाया। इनके द्वारा कई महत्वपूर्ण शास्त्र लिखे गए। जिसमें से नीतिशास्त्र की बातें आज भी प्रासंगिक हैं। मनुष्य के सदैव अपने माता-पिता का सम्मान करना चाहिए क्योंकि माता-पिता ही आपको इस संसार में लेकर आते हैं और आपका भरण-पोषण करते हैं। आपके जीवन को सुखमय और उज्वल बनाने के लिए एक पिता अपने दिन रात एक कर देता है, इसलिए सदैव अपने पिता का सम्मान करें। नीतिशास्त्र में पिता के अलावा भी चार ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है जिनका सदैव पिता के समान सम्मान करना चाहिए।
चाणक्य नीति: पिता के समान होते हैं ये चार लोग, सदैव करें इनका सम्मान
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किसी भी व्यक्ति के जीवन में गुरू का स्थान हमेशा पिता समान होता है। जहां पिता अपनी संतान का भविष्य संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करता है तो वहीं गुरू अपने ज्ञान से उसका भविष्य संवारता है। नीतिशास्त्र कहता है कि एक शिष्य को हमेशा अपने गुरू का सम्मान पिता की तरह करना चाहिए। जो व्यक्ति अपने गुरू की बताई शिक्षाओं पर चलता है उसका भविष्य और जीवन सुखमय एवं उज्वल होता है।
सनातन धर्म में एक व्यक्ति के जन्म से पूरे जीवन में 16 संस्कार बताए गए हैं। यज्ञोपवीत इन 16 धार्मिक रूप से 16 संस्कारों में से बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यज्ञोपवीत एक तरह से व्यक्ति का दूसरा जन्म होता है, इसलिए यज्ञोपवीत कराने वाला पुरोहित पिता के समान माना जाता है जो पुरोहित आपका यज्ञोपवीत करवाए उसका सम्मान सदैव पिता के समान करना चाहिए।
यदि आप अपने घर से दूर परदेस में हैं उस स्थान पर जो व्यक्ति आपके खाने-पीने और रहने की व्यवस्था करता है और अंजान स्थान पर आपका ध्यान रखता है उसका स्थान आपके पिता के समान हो जाता है। ऐसे में यदि आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति होता है तो सदैव उसका एहसान रखना चाहिए और हमेशा उसका सम्मानकरना चाहिए।
संकट आने पर एक पिता अपनी संतान की हर प्रकार से रक्षा करता है इसी तरह यदि संकट की घड़ी में कोई व्यक्ति हमारे प्राण बचाता है वह एक तरह से हमारे पिता के समान हो जाता है, इसलिए जो व्यक्ति आपके प्राणों की रक्षा करें उसे कभी नहीं भूलना चाहिए।