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Vaishakh Purnima 2021: इस दिन है वैशाख पूर्णिमा, जानें महत्व, तिथि और संपूर्ण पूजा विधि

Mon, 24 May 2021 04:37 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 24 May 2021 04:37 PM IST
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Vaishakh Purnima 2021 date timing shubh muhurat importance and full puja vidhi
वैशाख पूर्णिमा 2021(प्रतीकत्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला

प्रत्येक माह चंद्रमा की घटती और बढ़ती कलाओं के कारण अमावस्या और पूर्णिमा तिथि आती हैं। शुक्ल पक्ष में जब चंद्रमा पूर्ण होकर पूरी कलाओं में आता है तब पूर्णिमा होती है। माह की अंतिम तिथि को पूर्णिमा या फिर पूर्णमासी कहा जाता है। इस बार वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि 26 मई 2021 को पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा का पूजन एवं व्रत करने के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा भी करने का विधान है। तो चलिए जानते हैं वैशाख पूर्णिमा का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूर्ण व्रत पूजा विधि।

Vaishakh Purnima 2021 date timing shubh muhurat importance and full puja vidhi
वैशाख पूर्णिमा 2021(प्रतीकत्मक तस्वीर)
वैशाख पूर्णिमा का महत्व

वैसे तो प्रत्येक पूर्णिमा तिथि का बहुत महत्व माना जाता है लेकिन वैशाख पूर्णिमा को और भी ज्यादा खास माना गया है क्योंकि इस दिन भगवान बुद्ध का जन्म भी हुआ था। इसी कारण वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। भगवान बुद्ध को भी विष्णु जी का अवतार माना जाता है। पूर्णिमा तिथि पर व्रत करने और श्री हरि विष्णु एवं चंद्रदेव का पूजन करने से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है सुख-शांति की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा पर दान और पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने का भी विशेष महत्व होता है।

Vaishakh Purnima 2021 date timing shubh muhurat importance and full puja vidhi
वैशाख पूर्णिमा 2021(प्रतीकत्मक तस्वीर) - फोटो : @pixabay
वैशाख पूर्णिमा शुभ मुहूर्त

वैशाख पूर्णिमा तिथि आरंभ- 25 मई 2021 को रात 08 बजकर 29 मिनट से

वैशाख पूर्णिमा तिथि समाप्त- 26 मई 2021 को शाम 04 बजकर 43 मिनट पर

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Vaishakh Purnima 2021 date timing shubh muhurat importance and full puja vidhi
वैशाख पूर्णिमा 2021(प्रतीकत्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
वैशाख पूर्णिमा की पूजा विधि
  • इस दिन प्रातःउठकर पवित्र नदी में स्नान करें यदि नदी पर नहीं जा सकते तो घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान कर सकते हैं।
  • इसके पश्चात अपने घर और मंदिर को साफ करें और गंगाजल छिड़कें।
  • अब भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें प्रणाम करें और व्रत का संकल्प लें।
  • अब पूजा स्थान पर भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और हल्दी से तिलक करें।
  • अब विष्णु जी और मां लक्ष्मी की फल, फूल और नैवेद्य से विधिवत पूजन करें। 
  • भगवान विष्णु की हर पूजा में तुलसी को अवश्य शामिल करें। भोग या जल में तुलसी मिला सकते हैं।
  • पूजा पूर्ण होने के बाद आरती करें और फिर पूरे दिन व्रत करें।
  • शाम को पुनः भगवान विष्णु का पूजन करें उन्हें कसार (आटे या सूजी को भूनकर बनाया गया सूखा प्रसाद) का भोग लगाएं और पंचामृत अर्पित करें।
  • चंद्रयोदय होने का पश्चात चंद्रमा की पूजा करें एवं अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।
  • विष्णु जी के भोग के लिए तैयार किए गए कसार और पंचामृत में मेवा आदि के साथ तुलसी अवश्य डालें।
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