सूर्य सौरमंडल के संचालक हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार जिस तरह से एक माह में दो पक्ष होते हैं, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष, उसी तरह से एक वर्ष में दो भाग होते हैं, उत्तरायण और दक्षिणायन। सूर्यदेव वर्ष में छह माह उत्तरायण होते हैं और छह माह दक्षिणायन की गति करते हैं। सूर्य हर माह राशि परिवर्तन करते हैं जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसके बाद जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हुए आगे बढ़ते हैं और मिथुन में प्रवेश करते हैं, तब दक्षिणायन आरंभ होता है। 21 जून 2021 को मिथुन संक्रांति के बाद सूर्य देव की उत्तरायण की गति पूरी हो जाएगी और इसी के साथ वे दक्षिणायन हो जाएंगे। जिस तरह से सूर्य के उत्तरायण होने पर दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं उसी तरह से दक्षिणायन होने पर दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं। 21 जून यानी जिस दिन सूर्य दक्षिणायन होते हैं उस दिन कर्क रेखा पर सूर्य की किरणें लंबवत् पड़ती हैं, जिसके कारण इस दिन व्यक्ति छाया लगभग नहीं के बराबर हो जाती है। तो चलिए जानते हैं इसके धार्मिक महत्व और प्रभाव के बारे में विस्तार से।
इस दिन से सूर्यदेव हो रहें हैं दक्षिणायन, छोटे होने लगेंगे दिन, राते होने लगेंगी लंबी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Tue, 15 Jun 2021 05:48 PM IST
सार
21 जून 2021 को मिथुन संक्रांति के बाद सूर्य देव की उत्तरायण की गति पूरी हो जाएगी और इसी के साथ वे दक्षिणायन हो जाएंगे।
जिस तरह से सूर्य के उत्तरायण होने पर दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, उसी तरह से दक्षिणायन होने पर दिन छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं।
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