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मां के गर्भ से नहीं बल्कि अग्निकुंड से प्रकट हुई थीं द्रौपदी, जानें और क्या है रहस्य

Mon, 12 Aug 2019 02:54 PM IST
प्रशांत राय धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत राय Updated Mon, 12 Aug 2019 02:54 PM IST
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special story of draupadi birth in mahabharat
- फोटो : सोशल मीडिया

हम सभी जानते हैं कि द्रौपदी महाभारत की मुख्य चरित्र थीं। द्रौपदी पांचों पांडव की पत्नी थीं। लेकिन क्या आप इसके अलावा द्रौपदी के रहस्यों के बारे में जानते हैं। अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं द्रौपदी के विधवा होने से लेकर पांडवों की पत्नी होने तक की कहानी। द्रौपदी को पांचाली के नाम से जाना जाता है। द्रौपदी कान्हा की अतिप्रिय थीं। इसी वजह से जब भी द्रौपदी किसी मुसीबत में होती थीं, भगवान श्रीकृष्ण उन्हें बचाने आ जाते थे।



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special story of draupadi birth in mahabharat
- फोटो : amar ujala

महाभारत की कथाओं के मुताबिक द्रौपदी राजा द्रुपद की पुत्री थीं। लेकिन उनका जन्म मां के गर्भ से नहीं बल्कि हवन कुंड से हुआ था। राजा द्रपद ने ज्ञानी और तपस्वी दो ब्राह्मण भाइयों याज और उपयाज के निर्देश पर दिव्य हवन का आयोजन किया। क्योंकि द्रुपद एक ऐसे पुत्र की प्राप्ति चाहते थे जो कौरवों और पांडवों के गुरु, गुरु द्रोणाचार्य का वध कर सके। इस हवन के दौरान राजा द्रुपद को पुत्र और पुत्री दोनों की प्राप्ति हुई, जिनका नाम धृष्टद्युमन और द्रौपदी रखा गया। 

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भविष्य पुराण की कथा में इस बात का उल्लेख है कि पूर्वजन्म में द्रौपदी एक ब्राह्मण की पुत्री थी। इनके पति की मृत्यु हो जाने के चलते इन्हें वैधव्य का सामना करना पड़ता था। द्रौपदी ने ब्राह्मणों और साधुओं की बड़ी सेवा की थी। साधुओं की कृपा से इन्होंने स्थाली दान व्रत किया था। इस व्रत से उन्हें यह वरदान मिला कि वह देवी लक्ष्मी के समान होंगी। 

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पूर्वजन्म में अल्पायु में ही विधवा हो जाने के चलते द्रौपदी ने ऋषियों की सलाह पर महादेव की तपस्या करना शुरू कर दिया। भगवान शिव ने द्रौपदी की तपस्या से खुश होकर दर्शन दिया और वरदान मांगने को कहा। द्रौपदी ने वरदान के तौर पर ऐसा पति मांगा जो किसी एक पुरुष में गुण मिलना आसान नहीं था। इस वरदान के चलते द्रौपदी अगले जन्म में पांच पतियों की पत्नी बनीं। 

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द्रौपदी के पूरे जीवन में कुछ भी सामान्य नहीं था। द्रुपद अपनी बेटी का विवाह अर्जुन से कराना चाहते थे। लेकिन द्रौपदी के स्वयंवर से पहले ही लाक्षा गृह की घटना घट चुकी थी और लोगों को लगता था कि पांचों पांडवों और कुंती उस लाक्षा गृह में लगे आग में जल गए। जबकि पांचों पांडव उस गृह से बाहर निकलकर ब्राह्मण के भेष में रहने लगे थे। इस दौरान द्रौपदी के स्वयंवर की खबर पाकर पांडव भी ब्राह्मण के वेश में पहुंच गए। 

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