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Pradosh Vrat 2021: सावन के गुरु प्रदोष व्रत में आज इन मुहूर्त में भूलकर भी न करें शिव पूजा, जरूर पढ़ें ये कथा

Thu, 05 Aug 2021 01:25 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 05 Aug 2021 01:25 PM IST
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sawan guru pradosh vrat august 2021 do not worship lord shankar in these muhurat read story
गुरु प्रदोष व्रत 2021 मुहूर्त - फोटो : अमर उजाला

आज गुरु प्रदोष व्रत है। यह सावन माह का पहला प्रदोष व्रत है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रदोष व्रत प्रत्येक माह में दो बार त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है और आज श्रावण माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ा है इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की आराधना की जाती है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से प्रदोष व्रत का पालन करता है उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और उसकी समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन प्रदोष व्रत का फल भक्त को तभी मिलता है जब वह इस दिन प्रदोष व्रत की कथा सुनता है। इसलिए आज के दिन व्रती को प्रदोष व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण अवश्य करना चाहिए। इसके साथ ही अशुभ मुहूर्त में भी भोलेनाथ और मां गौरा की आराधना से भक्तों को पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है। अशुभ महूर्त में भगवान शिव की पूजा न करें।

सावन का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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गुरु प्रदोष व्रत 2021 मुहूर्त - फोटो : Social media

इन मुहूर्त में न करें शिवजी की आराधना
राहुकाल - दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजे तक। 
दुर्मुहूर्त काल- दोपहर 03 बजकर 35 मिनट से 04 बजकर 28 मिनट तक। 
वर्ज्य काल- दोपहर 01 बजकर 36 मिनट से 03 बजकर 20 मिनट तक।

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गुरु प्रदोष व्रत 2021 मुहूर्त - फोटो : google
गुरु प्रदोष व्रत कथा

एक बार इंद्र और वृत्तासुर नामक दैत्य के बीच घनघोर युद्ध हुआ। वृत्तासुर के पास आसुरी माया थी और उसने अपनी आसुरी माया से विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहुंचे। बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं।

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गुरु प्रदोष व्रत 2021 मुहूर्त - फोटो : pinterest
वृत्तासुर ने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए की घोर तपस्या

वृत्तासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है। उसने गंधमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया। पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था। एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया। वहां शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- ‘हे प्रभु! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे।’

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गुरु प्रदोष व्रत 2021 मुहूर्त - फोटो : Social media
मां पार्वती के श्राप से बना दैत्य 

चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिवशंकर हंसकर बोले- ‘हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है। मैंने मृत्युदाता-कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारणजन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!’ माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुईं- ‘अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा- अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे श्राप देती हूं।’

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