हिंदू धर्म में त्रयोदशी तिथि बहुत महत्व माना जाता है। यह तिथि भगवान शिव को समर्पित की जाती है। प्रत्येक माह में दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। इस बार आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत 07 जुलाई 2021 दिन बुधवार को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत का नाम सप्ताह के हिसाब से निर्धारित होता है इसलिए यह व्रत बुधप्रदोष कहलाएगा। प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त से पौन घंटे यानी 45 मिनट पहले आरंभ हो जाती है और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक की जाती है यानी इस व्रत में प्रदोष काल में पूजन का विधान है। यही कारण है कि इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान शिव के निमित्त व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने से सुख-समृद्धि आती है। तो आइए जानते हैं प्रदोष व्रत का महत्व तिथि पूजन विधि।
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Pradosh vrat july date 2021: इस दिन है जुलाई माह का पहला प्रदोष व्रत, महत्व तिथि सहित जानिए संपूर्ण पूजा विधि
Fri, 25 Jun 2021 06:48 PM IST
Shashi Shashi
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Fri, 25 Jun 2021 06:48 PM IST
सार
इस बार आषाढ़ मास में कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 07 जून को रखा जाएगा। जानिए व्रत, पूजन करने की विधि व शुभ मुहूर्त
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प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
बुध प्रदोष व्रत का महत्व-
बुधवार का दिन भगवान शिव के पुत्र गणेश जी को समर्पित किया जाता है। इस दिन व्रत पूजन करने से शिव जी के साथ भगवान गणेश की कृपा भी प्राप्त होती है। जिससे आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शुभता आती है। जातक को कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत करने से गौदान के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
प्रदोष व्रत मुहूर्त तिथि-
आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि आरंभ- 07 जुलाई 2021 रात 01 बजकर 02 से
आषाढ़ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि समाप्त- 08 जुलाई 2021 रात 03 बजकर 20 मिनट पर
त्रयोदशी तिथि पर सूर्योदय- सुबह 05 बजकर 04 मिनट पर
त्रयोदशी तिथि के दिन सूर्यास्त- शाम 06 बजकर 42 मिनट पर
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lord shiva
प्रदोष व्रत पूजा विधि-
- त्रयोदशी तिथि को प्रातः उठकर स्नानदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- अब मंदिर की साफ-सफाई करें और धूप दीप प्रज्वलित करें।
- शाम को प्रदोष काल के समय पुनः स्नानदि करके पूजन आरंभ करें।
- भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें और पुष्प, अक्षत, धूप, दक्षिणा और नैवेद्य आदि अर्पित करें।
- इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने हेतु चावल की खीर का भोग लगाना चाहिए।
- सुहागन स्त्रियों को मां पार्वती को श्रंगार का सामान और लाल चुनरी अर्पित करनी चाहिए।
- वहीं पर बैठकर आप शिव मंत्रो का जाप या शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
- इसके पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती की आरती उतारें।
- पूजन पूर्ण होने के बाद फलाहार करें।