Parsi New Year 2022: आज है पारसी न्यू ईयर 'नवरोज', जानिए इसकी परंपरा, इतिहास और महत्व
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वैसे तो एक साल में 365 दिन होते हैं, लेकिन पारसी समुदाय के लोग 360 दिनों का ही साल मानते हैं। बाकी साल के आखिरी पांच दिन गाथा के रूप में मनाए जाते हैं। यानी इन पांच दिनों में परिवार के सभी लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। नवरोज का उत्सव पारसी समुदाय में पिछले तीन हजार साल से मनाया जाता रहा है।
मान्यताओं के अनुसार पारसी समुदाय के लोग नवरोज का पर्व फारस के राजा जमशेद की याद में मनाते हैं। कहा जाता है कि करीब तीन हजार साल पहले पारसी समुदाय के एक योद्धा जमशेद ने पारसी कैलेंडर की स्थापना की थी। ये भी कहा जाता है कि इसी दिन ईरान में जमदेश ने सिंहासन ग्रहण किया था, उस दिन को पारसी समुदाय में नवरोज कहा गया था। तब से आज तक लोग इस दिन को नए साल के रूप में मनाते हैं।
नवरोज के दिन पारसी परिवार के सभी सदस्य सुबह जल्दी उठकर तैयार हो जाते हैं। इस दिन खास पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें पारसी लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ बांटते हैं। इसके अलावा वो इस दिन एक-दूसरे के प्रति सहयोग और प्रेम व्यक्त करने के लिए आपस में उपहार भी बांटते हैं। इसके अलावा पारसी समुदाय की मान्यताओं के अनुसार इस दिन राजा जमदेश की विशेष पूजा-अर्चना करने से परिवार में सुख और समृद्धि बढ़ती है।
इस दिन घर की साफ-सफाई करके घर के बाहर रंगोली बनाई जाती है। साथ ही पारसी लोग चंदन की लकड़ियों के टुकड़े घर में रखते हैं। ऐसा करने के पीछे उनकी ये मान्यता है कि चंदन की लकड़ियों की सुगंध हर ओर फैलने से हवा शुद्ध होती है।