फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है उत्तराखंड का प्रसिद्ध नंदा देवी मेला

Fri, 06 Sep 2019 08:28 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क,अमर उजाला
धर्म डेस्क,अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 06 Sep 2019 08:28 AM IST
विज्ञापन
nanda devi mela:  Symbol of cultural heritage
- फोटो : social media

देवभूमि उत्तराखंड की लोकप्रिय देवियां मां नंदा और सुनंदा का इन दिनों समूचें उत्तराखंड में  मोहत्सव चल रहा है। यह मोहत्सव पूरे सप्ताह बड़े ही हर्षों-उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता अनुसार मां नंदा-सुनंदा दो बहनें थीं। पुराणों में मां नंदा-सुनंदा की पूजा-अर्चना के साक्ष्य मिले हैं।



हर प्रकार की समस्या का ज्योतिषीय समाधान, जानिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

 

Trending Videos
nanda devi mela:  Symbol of cultural heritage
nanda devi doli

कथाओं में मां नंदा को नवदुर्गाओं में से एक बताया गया है। हिमालय में मां नंदा को शक्ति की देवी के रूप में भी जाना जाता है और इनकी पूजा भी इसी रूप में करने की प्रथा चली आ रही हैं। वैसे तो समूचे उत्तराखंड में इस समय हर्षो-उल्लास के साथ मां का यह पवित्र उत्सव मनाया जाता हैं। परन्तु जहां कहीं पर भी मां के मंदिर हैं वहां पर काफी भव्य मेलों का आयोजन किया जाता हैं। इन मेलों का आयोजन मां के सम्मान मे किया जाता है।

हर प्रकार की समस्या का ज्योतिषीय समाधान, जानिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

nanda devi mela:  Symbol of cultural heritage
चौखुटिया अंतर्गत तड़ागताल के ढनांण मे नंदा देवी मेले में नंदा मां के प्रतीक कदली वृक्ष को मंदिर की ओर ले जाते लोग। - फोटो : अमर उजाला

बागेश्वर जिले के कोट में नंदाष्टमी के दिन होने वाला मेला बड़ा ही प्रख्यात है। यह मेला 'कोट' की माई के नाम से मशहूर है। मेले के दौरान अपनी लोक विरासत के कारण मां नन्दा भगवती मन्दिर पोथिंग (कपकोट) और मां नन्दा देवी मंदिर नैनीताल अलग ही छठा बिखर रहे होते हैं।

सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के मध्य में स्थित ऐतिहासिक नन्दादेवी मंदिर में वैसे तो पूरे सप्ताह रंगारंग कार्यक्रम होते रहते हैं। लेकिन प्रतिवर्ष भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को होने वाले मेले की रौनक ही कुछ अलग होती है। यह मेला लोकजगत के विविध पक्षों और चंद वंश की राज-परम्पराओं से भी संबंध रखता है।

हर प्रकार की समस्या का ज्योतिषीय समाधान, जानिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

विज्ञापन
विज्ञापन
nanda devi mela:  Symbol of cultural heritage
nanda devi

मां नंदा-सुनंदा मेला सांस्कृतिक विरासत को संजोह कर रखे हुए हैं। इस मेले में परंपरा अनुसार मां-नंदा सुनंदा की भव्य प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इन प्रतिमाओं का निर्माण कदली स्तम्भ से किया जाता है। उत्तराखंड की लोकगाथा जागर का समावेश भी इस मेले में देखने को मिलता है। प्रतिमाओं का स्वरूप उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटी नन्दादेवी के सापेक्ष बनाया जाता है। नन्दादेवी का वास नन्दा पर्वत के शीर्ष पर है, इसका वर्णन स्कंद पुराण के मानस खंड में है।

हर प्रकार की समस्या का ज्योतिषीय समाधान, जानिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

विज्ञापन
nanda devi mela:  Symbol of cultural heritage
जै हो नंदा देवी तेरी जै बोला... - फोटो : अमर उजाला

मुख्य मेला अष्टमी को प्रारंभ होता है। इस दिन महिलाएं मांगलिक परिधानों में सज-सवर कर मां की पूजा के लिए मंदिर प्रांगण में एकत्र होती हैं। मेले के अंतिम दिन डोला उठता है, जिसमें दोनों देवियों के विग्रह रखे जाते हैं। डोले को नगर भ्रमण कराया जाता हैं।

अंत में देवी प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया जाता है। मेले के दिनों में उत्तराखंड कि लोक गाथाओं की धूम रहती हैं।

इन गाथाओं के गायक 'जगरिये' मंदिर परिसर में मां नंदा-सुनंदा की गाथा का गायन करते हैं। इस दौरान लोक गायकों की टोलियां नन्दा देवी मंदिर प्रांगण में एकत्र होती हैं। कहा जाता है कि उत्तराखंड की संस्कृति को समझने के लिए नंदादेवी मेला देखना जरूरी है।

हर प्रकार की समस्या का ज्योतिषीय समाधान, जानिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्यों से केवल 99 रुपये में। अभी आर्डर करें। (विज्ञापन)

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed