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मार्गशीष पूर्णिमा 2020: ये है मार्गशीष पूर्णिमा की तिथि, महत्व और व्रत विधि

Thu, 17 Dec 2020 04:42 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 17 Dec 2020 04:42 PM IST
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Margashirsha Purnima 2020 significance date Shubh Muhurat Vrat And Puja Vidhi
पूर्णिमा 2020

चंद्रमा का आकार दिनों के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है। इस तरह से हर माह की शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि को चंद्रमा अपनी पूर्ण कला में आ जाता है। जिसे पूर्णिमा तिथि या पूर्णमासी कहा जाता है। मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा 30 दिसंबर 2020 दिन बुधवार को पड़ रही है। अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से ये इस वर्ष की आखिरी पूर्णिमा तिथि है। वहीं इस दिन भगवान दत्तात्रेय जयंती भी है। इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जानते हैं पूर्णिमा तिथि का महत्व, समय और पूजा विधि 

Margashirsha Purnima 2020 significance date Shubh Muhurat Vrat And Puja Vidhi
Purnima

पूर्णिमा तिथि का महत्व
मार्गशीष की पूर्णिमा तिथि पर स्नान और  दान करने से अन्य पूर्णिमा तिथियों की तुलना में 32 गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर तुलसी की जड़ की रज से पवित्र नदी, सरोवर में स्नान करने से भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा व कथा करवाना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन सत्यनारायण की कथा परम फलदायी बताई गई है। पूर्णिमा तिथि के दिन शिव जी और चंद्रमा की पूजा करने का भी विशेष महत्व होता है।

Margashirsha Purnima 2020 significance date Shubh Muhurat Vrat And Puja Vidhi
Purnima - फोटो : अमर उजाला

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2020 शुभ मुहूर्त 
पूर्णिमा तिथि आरम्भ- 29 दिसंबर 2020 को 07 बजकर 55 मिनट से 
पूर्णिमा तिथि समाप्त- 30 दिसंबर 2020 को 08 बजकर 59 मिनट पर 

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Margashirsha Purnima 2020 significance date Shubh Muhurat Vrat And Puja Vidhi
Purnima 2020 - फोटो : अमर उजाला
पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि 
  • पूर्णिमा को प्रातःकाल उठकर स्नानादि करने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • ऊँ नमोः नारायण का उच्चारण करते हुए भगवान विष्णु का आवाह्न करें।
  • भगवान को गंध पुष्प आदि अर्पित करें और दीपक प्रज्वलित करें।
  • पूजा स्थल पर वेदी बनाकर उसमें सामाग्री की आहुति दें।
  • रात में चंद्रमा की पूजा करें अर्घ्य देने के पश्चात व्रत का पारण करें।
  • प्रातः उठकर पूजा करने के बाद ब्राह्मण को दान दक्षिणा दें।
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