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विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर में हुए हैं अद्भुत चमत्कार, भक्तों से सुनिए उनकी आंखों देखी...
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 28 May 2018 07:08 AM IST
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kedarnath dham
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दुनिया के इस प्रसिद्ध मंदिर में ऐसे-ऐसे चमत्कार हुए हैं जिन पर भरोसा करना बेहत मश्किल है। लेकिन जिन भक्तों ने इसका आभास किया है वह ही इस मंदिर अद्भुत महिमा का अहसास कर सकते हैं।
most horrible photos of kedarnath disaster
बाबा के इस धाम में साल 2013 में आई आपदा के दौरान सबसे बड़ा चमत्कार देखने को मिला। वहां मौजूद साधु-संत आज भी उस मंजर को भूल नहीं पाते। उन्होंने बताया कि जिस वक्त जल प्रलय आई और तीर्थयात्रियों समेत वहां की एक-एक चीज को बहा ले गई उस वक्त बाबा के मंदिर में खंरोच भी नहीं आई। एक बड़ी चट्टान मंदिर के पीछे उस पानी के साथ आई और मंदिर के थोड़ी सी पीछे रुक गई। वहीं यह सैलाब आस्था की सबसे बड़ी नींव यानी केदारनाथ मंदिर को हिलाने में नाकामयाब रहा। मंदिर का शिवलिंग और नंदी की मूर्ति वहीं बिल्कुल वैसे ही थी जैसे तबाही से पहली थी।
रंग-बिरंगी रोशनी में शाम के समय यूं नजर आ रहा केदारनाथ मंदिर।
- फोटो : Amar Ujala
धाम में मौजूद आए एक श्रद्धालु विनय नौटियाल ने बताया कि 2017 में जब मंदिर के कपाट बंद किए गए तो वहां गर्भगृह के कपाट बंद करने में खासी दिक्कतें हुई। दरवाजे के कुंडे नहीं लग पाए। लाख कोशिशों के बाद भी दरवाजे के कुंडे नहीं लग पाए। उस वक्त मंदिर के दरवाजों पर चांदी लगाई गई थी। इसलिए वह बंद नहीं हो पा रहे थे। लेकिन तभी वहां क्षेत्रपाल भकुंड भैरव का आह्वान किया गया। वहां देवता द्वारा कुंड को स्पर्श करते ही वह दूसरे कुंडे पर जुड़ गया।
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केदारनाथ
वहां के शिवलिंग में भी लोग असीम शक्तियां मानते हैं। केदारनाथ धाम में भगवान शिव के दर्शनार्थ गए लोग अक्सर मंदिर के गर्भगृह में महसूस होने वाली असीम शक्ति की बात करते हैं। शिवलिंग की आलौकिक ऊर्जा इस धाम को विशेष बनाती है। इस ऊर्जा को कई बार यहां आने वाले भक्तों ने भी महसूस किया गया है। मान्यता है कि केदारनाथ धाम में मात्र भगवान शिव का नाम जपने से ही आत्मा तृप्त होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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Kedarnath
- फोटो : AmarUjala
हाल ही में केदारनाथ में ऐसी घटना घटी जिसने सबको सोच में डाल दिया। जून के महीने में वहां ब्रह्मकमल खिल गया। पुलिस का कहना था कि यह पहला मौका है, जब जून माह के पहले पखवाड़े में क्षेत्र में यह उच्च हिमालयी पुष्प खिला हो। वैसे यह पुष्प जुलाई-अगस्त में खिलता है। बताया जाता है कि केदारनाथ के कपाट खुलने के मौके पर ब्रह्मकमल से ही उनका पूजन होता है।