स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के धार्मिक और शिक्षण संस्थानों में तिरंगा फहराने को लेकर जहां कुछ विवाद देखने को मिले, वहीं उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित परमार्थ आश्रम में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर झंडा फहराया। संभवत: भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब विभिन्न महजबों के लोगों ने धार्मिक एवं सामाजिक सद्भावना की मिसाल पेश करते हुए एक साथ गंगा तट पर तिरंगा फहराया।
अमन की मिसाल : गंगा तट पर मौलाना और महात्मा ने साथ फहराया तिरंगा
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कौमी एकता जिंदाबाद से गूंज उठा गंगा तट
इस ऐतिहासिक क्षण पर जब स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ देश के तमाम महात्मा, मौलाना, उलेमा और इमाम ने मिलकर तिरंगा फहराया तो पूरा गंगा तट हिंदुस्तान जिंदाबाद और कौमी एकता जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा।
चढ़ेगा सिर्फ देशभक्ति का रंग
आजादी के इस पावन पर्व पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अब देश में कहीं भी न दोरंगी नीति होगी न दोरंगा रंग होगा, होगा तो केवल देशभक्ति का रंग होगा। अब हर दोरंगी नीति तिरंगे में तब्दील होगी।
भाईचारे की बहेगी गंगा
मुख्य इमाम डॉ.इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि भाईचारे की इस समारोह से बड़ी मिसाल पूरे हिंदुस्तान में कहीं नहीं मिल सकती। हमारे धर्म अलग हो सकते है; इबादत के तरीके अलग हो सकते है, लेकिन हम सब भाई है। उन्होने कहा कि अब भाईचारे की गंगा बहना चाहिये।
अब मदरसा जाएंगे ऋषिकुमार
मदरसों के बच्चों व गुरुकुल के ऋषिकुमारों ने एक साथ आकर देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व मनाया। इस मौके पर डाॅ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने ऐलान किया कि 15 अगस्त को मदरसा गुरुकुल चलकर आया है और गुरुकुल अब आगामी 26 जनवरी को दारुल उलूम देवबंद मदरसा चलकर जायेगा।