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हर शुभ कार्य से पहले क्यों बनाया जाना जाता है स्वास्तिक, जानिए इसका कारण और लाभ

Tue, 01 Jun 2021 04:42 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 01 Jun 2021 04:42 PM IST
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Know the importance of Swastik in Hinduism advantages and right way to make Swastik symbol
स्वास्तिक

स्वास्तिक को अत्यंत प्राचीन समय से बहुत ही मंगल प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिन्ह अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक शब्द सु+अस+क शब्दों से मिलकर बना है। 'सु' का अर्थ अच्छा या शुभ, 'अस' का अर्थ 'सत्ता' या 'अस्तित्व' और 'क' का अर्थ 'कर्त्ता' या करने वाले से है। इस तरह से स्वास्तिक शब्द का अर्थ मंगल करने वाला माना गया है। स्वास्तिक को भगवान गणेश का प्रतीक भी माना जाता है। गणेश जी शुभता के देवता है और प्रथम पूजनीय हैं इसलिए भी हर कार्य से पहले स्वास्तिक का चिन्ह बनाना बहुत ही शुभ रहता है। खासतौर पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा में स्वास्तिक का चिन्ह अवश्य बनाया जाता है। आइए जानते हैं स्वास्तिक का चिन्ह बनाने का महत्व और इसे बनाने के लाभ।

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swastik
ये होता है शुभ स्वास्तिक

सामान्यतः स्वास्तिक दो रेखाओं द्वारा बनाया जाता है जो एक दूसरे को काटती हुई होती हैं। जो आगे बढ़कर मुड़ जाती हैं और इसकी चार भुजाएं बन जाती हैं। जिस स्वास्तिक में रेखाएं आगे की ओर इंगित करती हुई दायीं ओर मुड़ती हैं वह स्वास्तिक शुभ माना जाता है। यह स्वास्तिक जीवन में शुभता और प्रगति का संकेत होता है। स्वास्तिक बनाते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए बायीं ओर जाती हुई रेखाएं शुभ नहीं होती हैं।

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(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
स्वास्तिक की चार रेखाओं का अर्थ

ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य माना गया है और उसकी चारों भुजाओं को चार दिशाओं की उपमा दी गई है। इसके अलावा स्वास्तिक के मध्य भाग को विष्णु की कमल नाभि और रेखाओं को ब्रह्माजी के चार मुख, चार हाथ और चार वेदों के रूप में भी निरूपित किया जाता है। अन्य ग्रंथो में स्वास्तिक को चार युग, चार आश्रम (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) का प्रतीक भी माना गया है। यह मांगलिक विलक्षण चिन्ह अनादि काल से ही संपूर्ण सृष्टि में व्याप्त रहा है। भारतीय संस्कृति में स्वास्तिक को में प्राचीन समय से ही मंगल प्रतीक माना गया है इसलिए कुंडली बनानी हो, वही खाता का पूजन करना हो या फिर कोई भी शुभ अनुष्ठान स्वास्तिक अवश्य बनाया जाता है।

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स्वास्तिक - फोटो : सोशल मीडिया
स्वास्तिक का रंग

ज्यादातर स्वास्तिक को रोली या लाल कुमकुम से बनाया जाता है, क्योंकि हिंदू धर्म में लाल रंग को शुभ माना जाता है। इसके अलावा सिंदूर से भी स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। लोग आजकल बाजार से बने बनाए स्वास्तिक के चिन्ह लाकर लगा लेते हैं लेकिन यह सही नहीं रहता है स्वास्तिक सदैव स्वयं अंकित करना चाहिए।

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swastik
स्वास्तिक करता है वास्तु दोष दूर

वास्तु में भी स्वास्तिक के चिन्ह का बहुत महत्व माना गया है। यदि किसी के मुख्य द्वार में किसी प्रकार का दोष हो तो उसे अपने द्वार पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाया जाता है। माना जाता है कि इससे वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है और आपके घर में सुख-समृद्धि एवं शुभता बनी रहती है।

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