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Kalashtami July 2021: इस दिन है कालाष्टमी, जानिए तिथि महत्व और भगवान भैरव की पूजा विधि

Mon, 28 Jun 2021 09:23 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Mon, 28 Jun 2021 09:23 AM IST
सार

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर 01 जुलाई 2021 को कालाष्टमी व्रत किया जाएगा। इस दिन भगवान काल भैरव का पूजन और व्रत करने से जातक को भय, ग्रह बाधा और शत्रुओं से छुटकारा मिलता है।

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Kalashtami July 2021 date timing shubh muhurat importance and vrat puja vidhi of bhagwan kaal bhairav
kalashtami

हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत किया जाता है। कालाष्टमी को भैरवाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार कालाष्टमी का व्रत 01 जुलाई 2021 को रखा जाएगा। यह तिथि भगवान काल भैरव को समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भैरव, शिव जी के ही रूद्रावतार हैं। इन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है। भगवान भैरव के अष्ट स्वरुप हैं जिनमें से गृहस्थ जीवन जीने वाले साधारण जन को बटुक भैरव की आराधना करनी चाहिए। ये भगवान भैरव का सौम्य स्वरुप हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जो भी भगवान भैरव के भक्तों का अहित करता है उसे तीनों लोक में कही भी शरण प्राप्त नहीं होती है। इनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियों, भय और शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती है। तो आइए जानते हैं कालाष्टमी व्रत शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

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कालाष्टमी शुभ मुहूर्त
आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी आरंभ- 01 जुलाई 02:01 पी एम
आषाढ़ कृष्ण पक्ष अष्टमी समाप्त - 02 जुलाई 03:28 पी एम
 
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कालाष्टमी महत्व

कालाष्टमी पर भगवान कालभैरव की पूजा आराधना करने से शत्रु बाधा से मुक्ति प्राप्त होती है। इसी के साथ जातक को अंजान भय, ग्रह दोष आदि से भी मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान कालभैरव अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करते हैं। कालाष्टमी के दिन व्रत रखकर भगवान भैरव की पूजा से साधक के जीवन के संकट और समस्याएं दूर हो जाती हैं। 

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कालाष्टमी पूजा विधि-

  • अष्टमी तिथि के दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नानादि करके व्रत का संकल्प करें।
  • अब मंदिर की साफ-सफाई करके भगवान के सामने दीपक प्रज्वलित करें। 
  • कालभैरव भगवान के साथ भगवान शिव की भी विधि-विधान से पूजा  करें।
  • इसके बाद पूरे दिन व्रत करें और रात को पुनः पूजन करें।
  • भगवान कालभैरव की पूजा रात्रि के समय करने का विधान है।
  • धूप, काले तिल, दीपक, उड़द और सरसों के तेल से काल भैरव की पूजा करनी चाहिए।
  • इसके साथ ही उन्हें हलवा, मीठी पूरी और जलेबी आदि का भोग लगाना चाहिए।
  • वहीं पर बैठकर भैरव चालीसा का पाठ करें।
  • पाठ पूर्ण हो जाने के पश्चात आरती करें।
     
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