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4th Bada Mangal: चौथे बड़े मंगल पर करें बजरंगबली की आरती और चालीसा, मिलेगा श्रीराम का साथ

Tue, 03 Jun 2025 07:08 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 03 Jun 2025 07:08 AM IST
सार

Bada Mangal: हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह का चौथा बड़ा मंगल आज, यानी 3 जून 2025 को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिन भगवान राम और पवनपुत्र हनुमान के प्रथम मिलन की स्मृति में अत्यंत शुभ होता है। यही कारण है कि इस दिन व्रत करने और विशेष रूप से हनुमान जी की आराधना करने से भगवान श्रीराम की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
 

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Jyeshtha Maah Fourth Bada Mangal Hanuman Chalisa and Aarti Paath to Please Lord Hanuman and Shriram
Bada Mangal - फोटो : adobe stock

Hanuman Chalisa Aarti Paath On Bada Mangal: ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को विशेष रूप से "बड़ा मंगल" और अंतिम मंगलवार को "बुढ़वा मंगल" के रूप में मनाया जाता है। यह दिन पूरी तरह से भगवान हनुमान को समर्पित होता है, जो भक्ति, शक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। ऐसा माना जाता है कि इन दिनों व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।


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हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह का चौथा बड़ा मंगल आज, यानी 3 जून 2025 को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दिन भगवान राम और पवनपुत्र हनुमान के प्रथम मिलन की स्मृति में अत्यंत शुभ होता है। यही कारण है कि इस दिन व्रत करने और विशेष रूप से हनुमान जी की आराधना करने से भगवान श्रीराम की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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ऐसे शुभ दिन पर अगर आप हनुमान जी की कृपा चाहते हैं, तो उनकी भव्य आरती के साथ-साथ हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। हनुमान चालीसा न केवल संकटों से रक्षा करती है, बल्कि मन को शांति, साहस और ऊर्जा से भी भर देती है।
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हनुमान चालीसा में उनके पराक्रम, भक्ति और श्रीराम के प्रति उनकी निष्ठा का गहन वर्णन है। इसके नियमित पाठ से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। आज के दिन विशेष रूप से हनुमान चालीसा का 7, 11 या 21 बार पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
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इस बड़े मंगल पर, भगवान हनुमान और श्रीराम की संयुक्त आरती करें, चालीसा का पाठ करें और मन से प्रार्थना करें ।  इससे न केवल आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी, बल्कि आपके जीवन में स्थायी मंगल भी होगा।

Jyeshtha Maah Fourth Bada Mangal Hanuman Chalisa and Aarti Paath to Please Lord Hanuman and Shriram
Bada Mangal - फोटो : adobe stock

हनुमान चालीसा 

।। दोहा।।
श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।।
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ।।

।। चौपाई ।।
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुं लोक उजागर ।।
राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ।।
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ।।
कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुंचित केसा ।।
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । कांधे मूंज जनेउ साजै ।।
शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन ।।
बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ।।
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ।।
भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचन्द्र के काज संवारे ।।
लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ।।
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ।।
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ।।
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ।।
जम कुबेर दिगपाल जहां ते । कबि कोबिद कहि सके कहां ते ।।
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना ।।
तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना ।।
जुग सहस्त्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ।।
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लांघि गये अचरज नाहीं ।।
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ।।
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ।।
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ।।
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हांक तै कांपै ।।
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महावीर जब नाम सुनावै ।।
नासै रोग हरै सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ।।
संकट तै हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ।।
सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ।।
और मनोरथ जो कोई लावै । सोई अमित जीवन फल पावै ।।
चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ।।
साधु सन्त के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ।।
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ।।
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ।।
तुम्हरे भजन राम को पावै । जनम जनम के दुख बिसरावै ।।
अंतकाल रघुवरपुर जाई । जहां जन्म हरिभक्त कहाई ।।
और देवता चित्त ना धरई । हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ।।
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ।।
जै जै जै हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ।।
जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहि बंदि महा सुख होई ।।
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ।।
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय मह डेरा ।।

।। दोहा ।।
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ।।

 

Jyeshtha Maah Fourth Bada Mangal Hanuman Chalisa and Aarti Paath to Please Lord Hanuman and Shriram
Bada Mangal - फोटो : adobe stock

।। हनुमान जी की आरती।। 

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।।

अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।।

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।।
लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।।

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।।
पैठि पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।।

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारे। जै जै जै हनुमान उचारे।।

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।।

 

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Jyeshtha Maah Fourth Bada Mangal Hanuman Chalisa and Aarti Paath to Please Lord Hanuman and Shriram
Bada Mangal - फोटो : amar ujala

भगवान राम की आरती
 
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।

कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।

भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।

सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।

इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।

मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।

एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।

दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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