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जानिए विवाह के लिए कुंडली मिलान क्यों है जरूरी

Wed, 04 Dec 2019 06:01 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 04 Dec 2019 06:01 AM IST
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importance of Kundali matching before marriage
Marriage - फोटो : Marriage
सनातन धर्म में सोलह संस्कारों में से एक है- विवाह संस्कार। हिन्दू संस्कृति में विवाह को सात जन्मों का बंधन माना जाता है। जन्मों-जन्मों का यह रिश्ता बना रहे, इसके लिए विवाह से पहले वर और वधु की कुंडली का मिलान किया जाता है। 
importance of Kundali matching before marriage
कुंडली
वर-कन्या की कुंडलियों को देखकर उनके बीच 36 गुणों को मिलाया जाता है, दोनों के बीच 36 में से कम से कम 18 गुण मिलने चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, विवाह के लिए वर-कन्या की कुंडलियों को मिलना आवश्यक है। क्योंकि इससे यह ज्ञात किया जाता है कि लड़का-लड़की के नक्षत्र और ग्रह आदि एक दूसरे के लिए अनुकूल हैं या प्रतिकूल।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यदि वर और कन्या दोनों के नक्षत्र और गुण अनुकूल होते हैं तो उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है, लेकिन अगर दोनों की कुंडली में ग्रह नक्षत्र मेल नहीं खाते हैं तो उनका दांपत्य जीवन आगे चलकर कष्टमय बीतता है। दोनों के बीच आपसी तालमेल नहीं बनता है।
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importance of Kundali matching before marriage
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि जो लोग ज्योतिष शास्त्र पर विश्वास नहीं करते हैं वे मानते हैं कि विवाह के लिए कुंडली मिलान से ज्यादा जरूरी एक-दूसरे के प्रति स्नेह, विश्वास और आपसी समझ है।
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