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शिव की साधना के बाद अब कृष्ण की भक्ति में डूबेंगे भक्त, जानें भाद्रपद मास का महत्व

Mon, 27 Aug 2018 11:37 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 27 Aug 2018 11:37 AM IST
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importance and significance of bhadrapada month according to hindu panchang

रक्षाबंधन के साथ ही सावन का महीना खत्म हो चुका है। हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन के बाद भादो जिसे भाद्रपद महीना भी कहा जाता है शुरू हो रहा है। भाद्रपद चातुर्मास में आने वाला दूसरा महीना होता है। भादों महीना भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने से संबंधित है। भगवान श्रीकृष्ण ने भादो के महीने में रोहिणी नक्षत्र के वृष लग्न में जन्म लिया था। भादों का माह भी, सावन की तरह ही पवित्र माना जाता है। इस माह में कुछ विशेष पर्व पड़ते हैं जिनका अपना अलग महत्त्व होता है।

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भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना 
जिस प्रकार से सावन का महीना भगवान भोले शंकर की उपासना के लिए महत्व रखता है, उसी तरह भादो का महीना भगवान श्री कृष्ण की आराधना के लिए महत्व है। भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि में हुआ था। इस बार अष्टमी 2 सितम्बर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 पर खत्म हो जायेगी। 
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कजरी तीज
भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह 29 अगस्त को है। इस त्यौहार को उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में विशेष रूप से मनाया जाता है।  इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 
भादों महीने की कृष्ण अष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 2 और 3 अगस्त दोनों दिन मनाया जाएगा। क्योंकि इस बार अष्टमी 2 सितम्बर की रात 08:47 पर लगेगी और 3 तारीख की शाम 07:20 पर खत्म हो जायेगी। लिहाजा अष्टमी की रात 2 सितम्बर को ही होगी। पूरे भारत में जन्माष्टमी बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। आधी रात को कृष्ण का जन्म होता है। 

गणेश चतुर्थी
जन्माष्टमी के बाद गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार 13 अगस्त को गणेश चतुर्थी है।  यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा,उपवास आदि किया जाता है। गणेश चतुर्थी को चन्द्र दर्शन नहीं करने चाहिए।


परिवर्तनी एकादशी
भाद्रपद, शुक्ल पक्ष, एकादशी तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में देवझूलनी एकादशी मनाई जाती है। देवझूलनी एकादशी में विष्णु जी की पूजा, व्रत, उपासना करने का विधान है। देवझूलनी एकादशी को पदमा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है

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