प्रत्येक वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन से बसंत नवरात्रि आरंभ हो जाते हैं। चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरूआत मानी जाती है। चैत्र माह हिंदू नववर्ष का पहला महीना माना जाता है। इस दिन से ही पूरे वर्ष भर के अनुष्ठानों, पर्वों आदि के शुभ मुहूर्त तय किए जाते हैं। इस बार हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर 2078, 13 अप्रैल 2021 को आरंभ हो रहा है। इस बार 14 मार्च से खरमास आरंभ हुए थे, जो 14 अप्रैल के समाप्त हो रहा है। यही कारण है कि नववर्ष के साथ ही शुभ मांगलिक कार्य भी आरंभ हो जाएंगे। तो चलिए जानते हैं नवसंवत्सर 2078 की खास बातें।
Hindu New Year 2021: इस तारीख से शुरू हो रहा है हिन्दू नववर्ष, इसके साथ ही शुरू हो जाएंगे मांगलिक कार्य
इस दिन से शुरू होंगे मांगलिक कार्य
भारतीय कालगणना में विक्रम संवत पंचांग को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। विक्रम संवत पांचांग के अनुसार ही विवाह, नामकरण, गृहप्रवेश इत्यादि शुभकार्यों के शुभ मुहूर्त तय किए जाते हैं। 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होने के साथ नववर्ष से ही मांगलिक कार्यों की शुरूआत भी हो जाएगी।
महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष ''गुड़ी पड़वा''
महाराष्ट्र में हिंदू नववर्ष को गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो, उसी दिन से नवसंवत्सर आरंभ होता है।
हिंदू ग्रंथों में 60 संवत्सर का उल्लेख किया गया है। जिसके हिसाब से क्रमानुसार हर नवसंवत्सर का नाम निर्धारित होता है। इस तरह से नवसंवत्सर 2077 का नाम ''प्रमादी'' है, इसके अनुसार 2078 में इस नवसंवत्सर का नाम आनंद संवत्सर होना चाहिए लेकिन इस बार विचित्र संयोग बन रहा है इस संवत्सर का नाम ''आनंद'' न होकर ''राक्षस'' संवत्सर होगा।
कैसे हुआ विक्रमं संवत का आरंभ
विक्रम संवत् का आरंभ 57 ई. पू. में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर हुआ था। विक्रमादित्य के शासन से पहले उज्जैन पर शकों का शासन हुआ करता था। ये लोग अत्यंत क्रूर प्रवृत्ति के थे। ये अपनी प्रजा को सदैव कष्ट दिया करते थे। विक्रमादित्य को न्यायप्रिय और अपनी प्रजा के हित को ध्यान में रखने वाले शासक के रूप में जाना जाता था। राजा विक्रमादित्य ने उज्जैन की प्रजा को शकों के अत्याचारों वाले शासन से मुक्ति दिलाई और अपनी जनता का भय मुक्त कर दिया। जिसके बाद विक्रमादित्य के विजयी होने की स्मृति मेंं विक्रम संवत पंचांग का निर्माण किया गया था।