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देवउठनी एकादशी 2019: जानिए भगवान विष्णु को क्यों प्रिय है तुलसी

Thu, 07 Nov 2019 06:33 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 07 Nov 2019 06:33 AM IST
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dev uthani ekadashi 2019 tulsi is very important for lord vishnu

भगवान विष्णु की पूजा माता तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है और कहा जाता है कि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग भी नहीं चखते हैं। क्यों सृष्टि के पालनहारी तुलसी के पौधे को इतना मानते है,


 
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tulsi - फोटो : अमर उजाला

प्राचीन काल में जलंधर नाम के राक्षस ने धरती पर उत्पात मचा रखा था। पत्नी वृंदा का पतिव्रत धर्म उस राक्षस की वीरता का राज था।  कहा जाता है कि वृंदा की वजह से ही हमेशा विजय होता था। उस समय जलंधर के आतंक से परेशान होकर ऋर्षि-मुनि भगवान विष्णु के पास पहुंचे। भगवान ने काफी सोचकर वृंदा का पतिव्रत धर्म भंग करने का निश्चय किया। उन्होंने योगमाया से एक मृत शरीर वृंदा के घर के बाहर फिंकवा दिया।

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वृंदा को उसमें अपने पति का शव दिखाई दिया। अपने पति को मृत जानकर वह उस मृत शरीर पर गिरकर रोने लगी। उसी समय एक साधु उसके पास आए और कहने लगे बेटी इतनी दुखी मत हो। मैं इस शरीर में जान डाल देता हूं। साधु ने उसमें जान डाल दी। भावों में बहकर वृंदा ने उस शरीर का आलिंगन कर लिया। उधर उसका पति जलंधर जो देवताओं से युद्ध कर रहा था वह वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया बाद में वृंदा को पता चला कि यह तो भगवान विष्णु का छल है।


 
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इस बात का जब उसको पता चला तो उसने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस प्रकार आपने छल से मुझे पति वियोग दिया है उसी तरह आपको भी स्त्री वियोग सहने के लिए मृत्युलोक में जन्म लेना होगा और यह कहकर वृंदा अपने पति की अर्थी के साथ सती हो गई। जिस जगह वह सती हुई वहां तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। भगवान विष्णु अपने छल पर लज्जित होकर बोले कि हे वृंदा! यह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है और तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी।


 
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vishnu - फोटो : vishnu

इस घटना के बाद त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने भगवान राम के रूप में अवतार लिया और सीता के वियोग में कुछ दिनों तक रहे और यह भी कहा जाता है कि वृंदा ने विष्णु जी को यह श्राप भी दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है। तुम भी भगवान पत्थर के बनोगे और वही भगवान विष्णु का शालिग्राम रूप है।

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