महाभारत का महायुद्ध आज से करीब 5000 ई. पूर्व. लड़ा गया था ऐसी मान्यता है। उन दिनों भारत कई छोटे-छोटे गणराज्यों में बंटा हुआ था। इनमें कुरुवंश सबसे शक्तिशाली था जिसकी राजधानी हस्तिनापुर थी। माना जाता है कि वर्तमान मेरठ हस्तिनापुर की राजधानी थी।
महाभारत के समय ऐसी थी दिल्ली
हस्तिनापुर के साम्राज्य में खांडवप्रस्थ भी शामिल था जो वर्तमान दिल्ली है। महाभारत में उल्लेख किया गया है कि जब दुर्योधन के जिद्द के कारण हस्तिनापुर का विभाजन हुआ तब पांडवों को खांडवप्रस्थ दिया गया। खांडवप्रस्थ के बारे में कहा जाता है कि यहां की जमीन बंजर और पथरीली थी। यहां पर खेती करना काफी कठिन था। इसलिए पांडवों के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए उन्हें यह जमीन दी गई थी।
महाभारत के समय ऐसी थी दिल्ली
ऐसी कथा है कि जब पांडव खांडवप्रस्थ पहुंचे तो उन्हें हर तरफ घना जंगल मिला जिसे खांडव वन कहा जाता था। यहां पर असुर और नागों की बस्ती थी। कहते हैं कि खांडव वन कभी कौरव वंश की राजधानी थी। पुरुरवा, नहुष, ययाति ने यहीं से अपने साम्राज्य चलाया लेकिन बाद में ऋषि के शाप के कारण कौरवों की यह राजधानी उजाड़ हो गई और यह वन क्षेत्र बन गया।
महाभारत के समय ऐसी थी दिल्ली
ऐसी कथा है कि इन्द्रप्रस्थ बनाने के लिए यह जरुरी था कि खांडव वन को जलाया जाए इसके लिए श्री कृष्ण और अर्जुन ने अग्नि देव की सहायता ली और खांडव वन को जला दिया। लेकिन काम आसान नहीं था क्योंकि इस वन में इन्द्र का मित्र तक्षक नाग रहता था।
महाभारत के समय ऐसी थी दिल्ली
अपने मित्र की रक्षा के लिए इन्द्र ने वर्षा करना शुरु कर दिया। ऐसे में इंद्र और अर्जुन के बीच घमासान युद्ध हुआ जिसमें इंद्र ने अर्जुन की वीरता से प्रसन्न होकर दिव्यास्त्र देने का भरोसा और रास्ता दिखाया।