कार्तिक मास में पड़ने वाले अन्य त्योहारों के साथ साथ अहोई अष्टमी का पर्व भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्तिक मास के अष्टमी को अहोई माता का व्रत किया जाता है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु के लिए रखती हैं। अहोई अष्टमी निःसंतान दम्पत्ति भी संतान प्राप्ति की कामना के लिए रखते हैं। इस दिन माताएं पूरा दिन उपवास रख कर फिर विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा अर्चना करती हैं।
Ahoi Ashtami 2021: बच्चों के लिए रख रहीं है अहोई अष्टमी का व्रत, तो न भूलें ये नियम
आइए जानते हैं अहोई अष्टमी का व्रत रखने के लिए किन नियमों का महिलाओं को ध्यान रखना चाहिए-
सर्वप्रथम करें गणेश पूजन
अहोई अष्टमी के दिन वैसे तो अहोई माता की पूजा की जाती है लेकिन जैसा की आप सब जानते हैं श्रीगणेश सभी देवताओं में पूजनीय है, इसलिए सबसे पहले गणेश पूजन करना चाहिए।
तारों को देखकर खोलें व्रत
आमतौर पर जो भी व्रत किए जाते हैं वो चंद्रमा के दर्शन और उन्हे अर्घ्य देने के बाद पूर्ण होते हैं लेकिन अहोई अष्टमी पर व्रत तारों को देखकर खोला जाता है। तारें निकलने के बाद अहोई माता की पूजा की जाती है।
सात प्रकार के अनाज जरूरी
अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनते समय हाथ में 7 प्रकार के अनाज होने चाहिए जिसे पूजा के बाद गाय को खिलाना अनिवार्य है।
पूजा के दौरान बच्चों को जरूर बैठाएं
अहोई अष्टमी का व्रत बच्चों के लिए किया जाता है और मान्यता है कि पूजा के समय बच्चों का साथ जरूर बिठाना चाहिए। चूंकि इस व्रत को संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है, इसलिए पूजा के उपरांत माता को भोग लगाने के बाद प्रसाद अपने बच्चों को जरूर दें।