Tulsi Vivah 2024: हिंदू धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। घर में इसके पौधे को लगाने से सुख-समृद्धि बनी रहती हैं। माना जाता है कि नियमित रूप से यदि तुलसी के पौधे की पूजा की जाए तो आर्थिक स्थिति पर इसका शुभ प्रभाव पड़ता है।
Tulsi Vivah 2024: घर पर इस विधि से करें तुलसी विवाह, सभी देवी देवताओं का मिलेगा आशीर्वाद
Tulsi Vivah 2024: हिंदू धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। घर में इसके पौधे को लगाने से सुख-समृद्धि बनी रहती हैं।
तुलसी विवाह मुहूर्त 2024
इस साल 12 नवंबर 2024 को तुलसी विवाह का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 29 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।
तुलसी विवाह की पूजा विधि
- तुलसी विवाह के दिन सबसे पहले सुबह स्नान कर लें। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें।
- इसके बाद पूजा के लिए सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें।
- अब सर्वप्रथम एक लकड़ी की चौकी लें और उसपर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछा दें। इसके बाद तुलसी के पौधे को गेरू से सुंदर तरीके से रंग दें।
- फिर इसे चौकी पर स्थापित करें। एक और चौकी लें और उसपर भी साफ या नया वस्त्र बिछा दें। फिर भगवान शालिग्राम को चौकी पर स्थापित कर दें।
- दोनों चौकियों को एक दूसरे के पास में मिलाकर रख दें।
- दोनों के ऊपर गन्ने से मंडप बना लें, और उसे सजाएं।
- फिर आप एक साफ कलश में जल भर लें और उसमें पांच या फिर सात आम के पत्ते डाल दें। इसे चौकी पर रख दें।
- इस दौरान दीपक भी जला लें। अब तुलसी माता को लाल रंग की चुनरी ओढ़ाएं।
- इसके बाद चूड़ी, बिंदी आदि चीजों से श्रृंगार करते जाएं। फिर दोनों को रोली या कुमकुम से तिलक करें।
- अब सावधानी से चौकी समेत शालिग्राम जी को हाथों में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा कराएं।
- इस दौरान तुलसी विवाह मंत्रों को जप करते रहें।
- इसके बाद आरती करें और परिवार में प्रसाद का वितरण कर दें।
तुलसी माता का स्तुति मंत्र
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः,
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
मां तुलसी का पूजन मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
तुलसी माता का ध्यान मंत्र
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।